रुद्रपुर नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं, जिससे शहर का विकास प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। जनता को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाना होगा, ताकि भ्रष्टाचार मुक्त और स्वच्छ प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जा सके।

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संपादकीय:

रुद्रपुर,स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा ऑडिट: नगर निगम के वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सफाई और विकास कार्यों की निगरानी: स्थानीय नागरिक समितियों को निगरानी का अधिकार दिया जाए ताकि कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली: नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बनाया जाए, जिससे आम लोग सीधे शिकायत दर्ज करा सकें। सख्त कानूनी कार्रवाई: भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। निष्कर्ष

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

रुद्रपुर, उत्तराखंड का एक तेजी से विकसित होता शहर है, जो औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। लेकिन हाल के वर्षों में नगर निगम से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों ने शहर की छवि को धूमिल कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हो रही हैं, जिससे मूलभूत सुविधाओं का विकास ठप पड़ा है और जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

1. ठेकेदारों की मिलीभगत और घोटाले

रुद्रपुर नगर निगम द्वारा सड़कों, नालों, स्ट्रीट लाइटों और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए करोड़ों रुपये का बजट पास किया जाता है। लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन परियोजनाओं को आधे-अधूरे तरीके से या बेहद घटिया गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है। ठेकेदारों और निगम अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण अधूरे या खराब कार्यों को भी पास कर भुगतान कर दिया जाता है।

जनता की प्रतिक्रिया और विरोध

शहर में बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण नागरिकों में भारी असंतोष है। कई बार सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर पारदर्शिता की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नगर निगम के पार्षदों और अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं, जिससे जनता का विश्वास लगातार कम हो रहा है।

  1. स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा ऑडिट: नगर निगम के वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  2. शिकायत प्रणाली: नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बनाया जाए, जिससे आम लोग सीधे शिकायत दर्ज करा सकें।
  3. सख्त कानूनी कार्रवाई: भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।


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