वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में “प्रारंभ-2026” का शुभारंभ, नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला नवाचार और समग्र विकास का संदेश

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वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में “प्रारंभ-2026” का शुभारंभ, नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला नवाचार और समग्र विकास का संदेश
देहरादून, 17 अगस्त 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंडक्शन कार्यक्रम “प्रारंभ-2026” का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी संकाय, प्रबंधन संकाय, फार्मेसी संकाय तथा महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, संस्थागत संस्कृति, उपलब्ध संसाधनों तथा भविष्य के अवसरों से परिचित कराना है।
कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर, कुलसचिव डॉ. राजेश उपाध्याय तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. विशाल रमोला भी मंच पर मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें जीवन के इस नए अध्याय के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता के विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत से ही सामूहिक भावना के साथ कार्य करना चाहिए। टीमवर्क, अनुशासन और आपसी सहयोग विद्यार्थियों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रही है और विश्वविद्यालय भी विभिन्न व्यवस्थाओं को तकनीकी रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावहारिक विकास के लिए अनेक नई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। नए पाठ्यक्रमों के बेहतर एकीकरण के माध्यम से विद्यार्थियों को अधिक व्यापक ज्ञान उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील नागरिक का निर्माण करना भी है। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देगा, जिनसे विद्यार्थियों का तकनीकी, सामाजिक, शैक्षणिक और व्यक्तित्व विकास एक साथ सुनिश्चित हो सके।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की इच्छा सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नए उत्साह और नई ऊर्जा के साथ अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत करने का आह्वान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को केवल कक्षा तक सीमित रहने के बजाय सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को “एक भारत श्रेष्ठ भारत”, स्वच्छता अभियान और नशा मुक्ति अभियान जैसी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इससे समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी भी मजबूत होती है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सकारात्मक सोच, कौशल विकास और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है। वर्तमान समय में बहुआयामी शिक्षा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसलिए विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ नए विषयों और आधुनिक तकनीकों को भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को समझने की सलाह देते हुए अधिक से अधिक भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि बहुभाषिक ज्ञान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को समृद्ध बनाता है और उनके लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसरों के द्वार खोलता है।
डॉ. धन सिंह रावत ने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में प्रवेश के बाद अपने अनुभव साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थियों के पास किसी नई पहल या सुधार को लेकर कोई सुझाव है तो उन्हें खुलकर अपने विचार रखने चाहिए। विद्यार्थियों के सुझाव किसी भी शैक्षणिक संस्थान को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के साथ सकारात्मक और सम्मानजनक संबंध स्थापित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिन कुछ नया सीखने की आदत विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर अनुभव से जुड़ी हुई है।
उन्होंने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी युवाओं के कंधों पर ही है। यदि नई पीढ़ी ज्ञान, कौशल, नवाचार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ेगी तो भारत विश्व के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक अतिरिक्त बालिका छात्रावास और एक नए मल्टीपर्पज हॉल की स्थापना के लिए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने पुस्तकालय, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक अन्य सुविधाओं को भी और अधिक सुदृढ़ करने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए विद्यार्थियों को अपने विचारों और रचनात्मक सोच को सामने लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नए और उपयोगी सुझाव साझा करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों के साथ संवाद भी रहा। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर उनकी अपेक्षाओं, अनुभवों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए और विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी अपेक्षाओं को सामने रखा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक और विश्वविद्यालय के शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। इससे कार्यक्रम का वातावरण और अधिक उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक बन गया।
कार्यक्रम के अंत में सहायक प्राध्यापक डॉ. विशाल रमोला ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नई पहल करता रहेगा।
गौरतलब है कि यह इंडक्शन कार्यक्रम 17 अगस्त से 22 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन विषय-विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न समसामयिक और महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान एवं सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रणाली, विभिन्न गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों से परिचित कराना है, ताकि वे अपनी शैक्षणिक यात्रा को सकारात्मक, अनुशासित, जिम्मेदार और नवाचार आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा सकें।


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