

:जनता की जान की कीमत कब समझेगी सरकार?

रुद्रपुर/दिनेशपुर/किच्छा/बिलासपुर:
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर ज़िले में हाल ही की घटनाओं ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। सिडकुल पारले चौक पर दो नवयुवकों की दर्दनाक मौत, दिनेशपुर सुंदरपुर स्कूल रोड पर सड़क हादसे में एक व्यक्ति की जान, और किच्छा में ट्रेन से कटकर एक अन्य की मौत—ये महज़ आंकड़े नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी के शिकार इंसानी ज़िंदगियाँ हैं।
प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)संवाददाता]
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा घोषित “गड्ढा मुक्त सड़क” अभियान केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। दिनेशपुर और सिडकुल की सड़कें गड्ढों से इतनी भरी हुई हैं कि वे अब मौत का निमंत्रण बन चुकी हैं।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल रुद्रपुर के पोस्टमार्टम हाउस में मर्तकों के परिजनों के साथ बने हुए हैं, हर संपर्क कार्रवाई का भरोसा दिया है।
“कब सुधरेगा सिस्टम?”
ठुकराल ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क की हालत नहीं सुधारी गई तो न जाने कितने और युवा डिवाइडर या गड्ढों का शिकार होंगे। उन्होंने मांग की है कि निर्माणाधीन फ्लावर प्रोजेक्ट और सड़कों पर सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
निजी अस्पताल बना मौत का केंद्र?
एक और दुखद घटना में, बिलासपुर निवासी सुमन (28) की मौत रुद्रपुर के न्यूरो सेंटर (डॉ. सोलंकी) में इलाज के दौरान हो गई। आरोप है कि इलाज के नाम पर ₹2.25 लाख वसूलने के बाद भी महिला की जान नहीं बच सकी, और मृत्यु के पश्चात अस्पताल ने ₹70,000 अतिरिक्त मांगकर शव को रोकने की कोशिश की।
स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि राधेश शर्मा और मीडियाकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामला उजागर हो पाया। डॉक्टर द्वारा धमकी दिए जाने के भी आरोप लगे हैं। यह घटना न केवल मेडिकल लापरवाही, बल्कि गरीब मरीजों के प्रति निजी अस्पतालों की निर्दयता को उजागर करती है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पंचनामा, पोस्टमार्टम की कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि परिजनों से वसूली गई राशि वापस कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
समाजसेवी संजय ठुकराल ने भी तीनों घटनाओं पर संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार और जिला प्रशासन से अपील की है कि अब वक्त है, जब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, धरातल पर ठोस कार्रवाई की जाए।
सरकार और प्रशासन से सवाल:
- क्या गड्ढों से भरी सड़कों को मरम्मत कर जीवनदायिनी बनाया जाएगा?
- क्या निजी अस्पतालों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी?
- क्या इन मौतों को केवल आंकड़ा मानकर दबा दिया जाएगा या न्याय दिलाया जाएगा?
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल,अब वक्त है जागरूक होने का, सवाल पूछने का, और आवाज़ उठाने का।
क्योंकि अगर आज नहीं बोले, तो कल किसी अपने की बारी हो सकती है।




