काशीपुर हत्याकांड से सनसनी, UCC पर अरशद मदनी के बयान से सियासत गरम—उत्तराखंड में सुरक्षा और अधिकारों पर बहस तेज
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
काशीपुर/देहरादून। उत्तराखंड में एक ओर काशीपुर में पूर्व उप ब्लॉक प्रमुख हरदीप सिंह की हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश किया है, वहीं दूसरी ओर समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। दोनों घटनाओं ने अलग-अलग कारणों से प्रदेश में कानून-व्यवस्था, नागरिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।
बचपन के दोस्त पर हत्या का आरोप
काशीपुर में पूर्व उप ब्लॉक प्रमुख हरदीप सिंह की गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने उनके बचपन के दोस्त संदीप सिंह उर्फ सोना और उसकी पत्नी संदीप कौर को गिरफ्तार किया है। एसएसपी अजय गणपति के अनुसार, पुलिस जांच में सामने आया कि रुपयों के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच पुराना विवाद था।
पुलिस के मुताबिक घटना की रात हरदीप सिंह और संदीप सिंह ने एक ढाबे पर खाना खाया और इसके बाद संदीप के घर पहुंचे। वहां दोनों ने शराब पी। इसी दौरान रुपयों के लेन-देन को लेकर विवाद बढ़ गया। पुलिस का दावा है कि कमरे में रखी हरदीप की लाइसेंसी पिस्टल से संदीप ने सात राउंड फायर किए, जिनमें दो गोलियां हरदीप के पेट में लगीं। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस के अनुसार हत्या के बाद संदीप घायल हरदीप को स्वयं अस्पताल लेकर गया और उनके स्वजन को भी सूचना दी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शक से बचने और जांच को गुमराह करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
30 लाख रुपये और बुलडोजर का विवाद
पुलिस पड़ताल में करीब 30 लाख रुपये के लेन-देन का विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार हरदीप सिंह ने संदीप के नाम पर हरिद्वार से करीब आठ लाख रुपये का सेकेंड हैंड बुलडोजर खरीदवाया था। इसी आर्थिक लेन-देन को विवाद की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त लाइसेंसी पिस्टल, कारतूस और घटना में इस्तेमाल कार बरामद करने की बात कही है। मामले में संदीप की पत्नी की भूमिका भी पुलिस जांच में सामने आई है। पुलिस का दावा है कि उसने कमरे में फैले खून को साफ कर साक्ष्य मिटाने में मदद की। घटना के समय मौजूद संदीप की मां की भूमिका की भी जांच जारी है।
UCC पर अरशद मदनी का बयान
इसी बीच समान नागरिक संहिता को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित बयान पर प्रतिक्रिया दी है। मदनी ने कहा कि मुसलमान अपने धर्म और धार्मिक मामलों से जुड़े अधिकारों को लेकर समझौता नहीं कर सकते।
उन्होंने दावा किया कि UCC धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। मदनी ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि अनुसूचित जनजातियों को UCC से छूट दी जा सकती है तो अन्य धार्मिक समुदायों के अधिकारों पर भी विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
जमीयत की ओर से उत्तराखंड में लागू UCC को लेकर न्यायालय का रुख किए जाने की बात भी मदनी ने कही है। उनके अनुसार इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट में कई सुनवाई हो चुकी हैं और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सहित अन्य अधिवक्ता जमीयत की ओर से पैरवी कर रहे हैं।
धामी सरकार को लेकर भी चर्चा
UCC को लेकर उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने इसे लागू किया है। इसी वजह से प्रदेश में इसके प्रावधानों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा होती रही है। मदनी के बयान में उत्तराखंड का विशेष उल्लेख होने से प्रदेश सरकार की नीति एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई है।
हालांकि, काशीपुर का हत्याकांड और UCC विवाद दो अलग-अलग घटनाएं हैं। एक मामला आपराधिक जांच और हत्या से जुड़ा है, जबकि दूसरा संविधान, व्यक्तिगत कानून और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कानूनी एवं राजनीतिक विमर्श का विषय है। दोनों घटनाओं ने अलग-अलग संदर्भों में उत्तराखंड में सुरक्षा, कानून और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने रखा है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के लिए—अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर।
