- उफान पर नदियां: नानक सागर बैराज के गेट खुलने से पीलीभीत के 18 गांवों का संपर्क टूटा, स्कूल बंद
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
- सावधान! नानक सागर डैम का बढ़ा जलस्तर, देवहा और खकरा नदी में उफान से निचले इलाकों में मंडराया बाढ़ का खतरा
- उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: नानक सागर बैराज से छूटा पानी, यूपी के इन जिलों में मची खलबली
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नानक सागर डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहना पड़ रहा है। बढ़ते जल दबाव को नियंत्रित करने के लिए जलाशय से 30,000 क्यूसेक से अधिक पानी नियंत्रित तरीके से देवहा और कैलाश नदियों में छोड़ा जा रहा है। इस बड़े डिस्चार्ज के कारण उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अचानक बाढ़ और जलभराव का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
डैम से पानी छोड़े जाने के कारण निम्नलिखित क्षेत्रों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बन सकती है:
🚨 मुख्य प्रभावित होने वाले क्षेत्र
- उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला (सबसे अधिक खतरा): नानक सागर से पानी छोड़े जाने के बाद देवहा, शारदा और खकरा नदियां उफान पर हैं। पीलीभीत के निचले और मैदानी इलाकों में पानी घुसने लगा है। यहां की खकरा नदी का पुल डूबने से करीब 18 गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है।
- उधम सिंह नगर और खटीमा (उत्तराखंड): डैम के आसपास के तराई क्षेत्र, विशेषकर खटीमा, नानकमत्ता और सितारगंज के निचले गांवों में जलभराव की गंभीर आशंका बनी हुई है। नदियों के किनारे बसे गांवों को खाली करने की चेतावनी दी जा रही है।
नानक सागर डैम: लाइव अपडेट बुलेटिन
- नियंत्रित जल निकासी: पहाड़ों और स्थानीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते डैम में पानी की आवक बहुत ज्यादा है। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग 24 घंटे स्थिति की पैनी निगरानी कर रहे हैं और आवश्यकतानुसार पानी रिलीज कर रहे हैं।
- प्रशासनिक तैयारियां: बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का स्थानीय प्रशासन तालमेल बनाकर काम कर रहा है ताकि अचानक पानी बढ़ने से जान-माल का नुकसान न हो। निचले इलाकों के निवासियों को तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है।
- यातायात बाधित: तराई और मैदानी इलाकों को जोड़ने वाले कई ग्रामीण संपर्क मार्ग और पुलिया जलमग्न हो चुके हैं, जिससे स्थानीय परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ
