हल्द्वानी/रानीबाग। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और सनातन संस्कृति का अद्भुत स्वरूप उस समय देखने को मिला, जब द्वाराहाट से रानीबाग धाम तक देवी-देवताओं की पावन स्नान यात्रा श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, “जय जिया रानी” के गगनभेदी जयघोष और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच यह दिव्य यात्रा पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना गई।
रानीबाग धाम में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में उत्तराखंड की लोक आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अनुपम संगम देखने को मिला। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था का जीवंत उत्सव बताया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
यात्रा के दौरान देवी-देवताओं की डोलियों का भव्य स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल श्रद्धालु, महिलाओं के मंगल गीत, ढोल-दमाऊं की गूंज और धार्मिक जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालु पूरे मार्ग में फूलों की वर्षा कर देव डोलियों का अभिनंदन करते रहे।
रानीबाग धाम में पवित्र स्नान की धार्मिक परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर देवी-देवताओं के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का वास होता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बने।
इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल बनाने में नैनीताल पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पूरे यात्रा मार्ग, रानीबाग धाम परिसर तथा प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी सतर्कता के साथ संभाला। यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था और श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
पुलिस कर्मी लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था या परेशानी उत्पन्न नहीं हुई। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, स्वयंसेवकों और आयोजन समिति के बीच बेहतर समन्वय के चलते हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं ने नैनीताल पुलिस की सेवा भावना, अनुशासन और समर्पण की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर श्रद्धालु की सहायता के लिए तत्पर दिखाई दी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष सहयोग प्रदान किया गया, जिससे सभी श्रद्धालुओं ने सहज और सुरक्षित वातावरण में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की।
सोशल मीडिया पर भी इस धार्मिक आयोजन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होती रहीं। श्रद्धालुओं ने अपने संदेशों में लिखा कि “देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि द्वाराहाट से हल्द्वानी रानीबाग धाम तक देवताओं की दिव्य स्नान यात्रा का शुभ अवसर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल लेकर आए। जय जिया रानी, जय देवभूमि उत्तराखंड।” इन संदेशों के माध्यम से लोगों ने उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजन केवल आस्था के केंद्र नहीं होते, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम बनते हैं। उत्तराखंड की देव संस्कृति सदियों से प्रकृति, लोक जीवन और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ी रही है, जिसकी झलक इस आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि और सभी नागरिकों के मंगल की कामना करते हुए जिया रानी से आशीर्वाद मांगा। पूरे आयोजन में अनुशासन, भक्ति और सेवा की भावना प्रमुख रूप से देखने को मिली।
आयोजन समिति ने नैनीताल पुलिस, जिला प्रशासन, स्वयंसेवकों तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से यह विशाल धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने की अपील की।
रानीबाग धाम में संपन्न हुई यह दिव्य स्नान यात्रा एक बार फिर यह संदेश देकर गई कि देवभूमि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि ही नहीं, बल्कि सनातन आस्था, लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की भी पावन धरा है। “जय जिया रानी” के उद्घोष के साथ संपन्न यह आयोजन श्रद्धालुओं के मन में अविस्मरणीय स्मृतियां छोड़ गया और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान कर गया।
रानीबाग तीर्थ में उमड़ी आस्था, कुलदेवी जियारानी एवं कुल देवताओं का हुआ पावन स्नान
25 जुलाई 2026 को कुमाऊं के प्रथम द्वार माने जाने वाले पवित्र रानीबाग तीर्थ (चित्राशिला घाट) में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कत्यूरी वंश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी कुलदेवी जियारानी एवं कुल देवताओं की डोलियों को लेकर यहां पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पावन स्नान कराया। इस दौरान पूरा क्षेत्र “जय जिया रानी” के जयघोष से गूंज उठा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रानीबाग स्थित चित्राशिला घाट कुमाऊं का एक अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहां सदियों से धार्मिक मेलों (कौतिक) की परंपरा चली आ रही है। मकर संक्रांति, महाशिवरात्रि और पौष माह की पूर्णिमा जैसे पावन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु इस तीर्थ में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश हरिद्वार जाकर गंगा स्नान नहीं कर पाते, वे रानीबाग तीर्थ में श्रद्धापूर्वक स्नान कर समान आध्यात्मिक पुण्य अर्जित करते हैं।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति, कत्यूरी वंश की परंपराओं और सनातन आस्था का जीवंत प्रतीक भी है, जो नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।
