नेत्रदान महादान: कुसुम चावला की आंखों से दो जरूरतमंदों को मिलेगी नई रोशनी, परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

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रुद्रपुर। जीवन का सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है, लेकिन कुछ लोग अपने जाने के बाद भी समाज के लिए ऐसी अमिट छाप छोड़ जाते हैं जो वर्षों तक लोगों को प्रेरित करती रहती है। रुद्रपुर के भूरारानी क्षेत्र निवासी स्वर्गीय श्रीमती कुसुम चावला (41 वर्ष) का निधन भले ही उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति लेकर आया हो, लेकिन उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी में ऐसा निर्णय लिया जिसने दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी की नई किरण जगा दी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


स्वर्गीय श्रीमती कुसुम चावला के पति श्री हरीश कुमार चावला ने अपनी पत्नी के निधन के बाद नेत्रदान के लिए सहमति देकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस संवेदनशील और मानवीय निर्णय से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बनेगी। यह कदम न केवल मानव सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में आशा का दीप जला सकता है।
नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एस. के. मित्तल तथा सी. आर. मित्तल नेत्रदान केंद्र के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एल. एम. उप्रेती के निर्देशन में संपन्न हुई। ट्रस्ट से जुड़े आई टेक्नीशियन मनीष रावत ने आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अत्यंत सावधानी और चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप नेत्र सुरक्षित निकाले।
इस पुनीत कार्य में श्री संजय ठुकराल एवं श्री संदीप चावला का विशेष सहयोग रहा। दोनों ने परिवार का हौसला बढ़ाते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार के इस निर्णय की स्थानीय स्तर पर व्यापक सराहना की जा रही है।
नेत्रदान के समय परिवार के सदस्य एवं शुभचिंतक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें गुलशन कुमार, अक्षय चावला, चंदर चावला, सुरेंद्र चावला, सुनील जडवानी सहित अन्य परिजन और परिचित शामिल थे। सभी ने स्वर्गीय कुसुम चावला को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के इस महान निर्णय की सराहना की।
महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि नेत्रदान वास्तव में महादान है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसकी आंखें दो लोगों के जीवन में प्रकाश भर सकती हैं। आज भी देश में लाखों लोग कॉर्निया की समस्या के कारण दृष्टिहीन हैं और उन्हें नेत्र प्रत्यारोपण का इंतजार रहता है। ऐसे में यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं तो हजारों लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है।
ट्रस्ट ने इस अवसर पर सोचो डिफरेंट संस्था गदरपुर, भारत विकास परिषद, भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी तथा इस अभियान से जुड़े सभी स्वयंसेवी संगठनों और समाजसेवियों का भी आभार व्यक्त किया। इन संस्थाओं द्वारा लगातार लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब समाज में दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति के निधन के कुछ घंटों के भीतर नेत्र सुरक्षित निकालकर संरक्षित किए जाते हैं। बाद में चिकित्सकीय जांच के उपरांत इन्हें उन मरीजों में प्रत्यारोपित किया जाता है जिन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है। इस प्रकार एक नेत्रदाता दो व्यक्तियों के जीवन में दृष्टि का संचार कर सकता है।
स्वर्गीय कुसुम चावला के परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी। ऐसे निर्णय समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करते हैं और दूसरों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं। परिवार ने कहा कि यदि उनके इस निर्णय से दो लोगों की दुनिया रोशन होती है, तो यही स्वर्गीय कुसुम चावला के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
समाजसेवियों का कहना है कि आज जरूरत इस बात की है कि नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए। नेत्रदान से न तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया प्रभावित होती है और न ही मृतक के सम्मान में कोई कमी आती है। इसके विपरीत यह ऐसा महान कार्य है जो किसी अंधेरे जीवन में नई सुबह लेकर आता है।
रुद्रपुर में संपन्न हुआ यह नेत्रदान एक बार फिर यह साबित करता है कि सेवा और संवेदना की कोई सीमा नहीं होती। जब समाज के लोग ऐसे निर्णय लेते हैं तो मानवता का विश्वास और मजबूत होता है। स्वर्गीय श्रीमती कुसुम चावला की आंखों से अब दो जरूरतमंद व्यक्ति इस खूबसूरत संसार को देख सकेंगे और यही उनके जीवन की सबसे बड़ी विरासत बनेगी।
स्वर्गीय कुसुम चावला को विनम्र श्रद्धांजलि


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