नंदा राजजात यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव
- अंतिम मानव बस्ती: बाण गाँव को नंदा देवी राजजात यात्रा के मार्ग पर पड़ने वाला अंतिम गढ़वाली गाँव (मानव बस्ती) माना जाता है। इसके आगे निर्जन पहाड़ियां, बुग्याल (घास के मैदान) और बर्फानी रास्ते शुरू हो जाते हैं।
- अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
लाटू देवता का मंदिर (सच्चा रक्षक)
- बाण गाँव में ही उत्तराखंड के प्रसिद्ध लाटू देवता का मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लाटू देवता माँ पार्वती (नंदा देवी) के धर्म भाई हैं।
- मां नंदा राजराजेश्वरी और बाण (वांण) गाँव का संबंध उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात (बड़ी जात) से गहराई से जुड़ा हुआ है। चमोली जिले में स्थित बाण गाँव (Wan Village) इस ऐतिहासिक और दुर्गम यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, जहाँ मां नंदा (राजराजेश्वरी) की डोली प्रवास करती है।
- माँ राजराजेश्वरी की विदाई और आगे की अत्यंत कठिन यात्रा (जैसे बेदनी बुग्याल, रूपकुंड और होमकुंड) के लिए लाटू देवता को ही इस क्षेत्र का रक्षक और मुख्य मार्गदर्शक माना जाता है।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व
- बधान और दसौली का मिलन: बाण गाँव वह स्थान है जहाँ अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे दसौली, बधान) से आने वाली माँ नंदा की डोलियों और भक्तों का संगम होता है।
- पारंपरिक आस्था: स्थानीय लोग माँ राजराजेश्वरी को अपनी कुलदेवी और आदि शक्ति का रूप मानते हैं। गाँव में माँ के स्वागत और विदाई के समय पूरा माहौल अत्यंत भावुक और भक्तिमय हो जाता है।
(नोट: उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में माँ राजराजेश्वरी के अन्य प्रमुख सिद्धपीठ जैसे देवलगढ़ (पौड़ी गढ़वाल) और चूलागढ़ (टिहरी गढ़वाल) भी स्थित हैं, जो राजवंशों की कुलदेवी के रूप में पूजे जाते हैं)।
