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संविधान के प्रारूप प्रस्तुति दिवस पर बाबा साहब को नमन, स्वच्छता कर्मियों का हुआ सम्मान

कुमाऊं की होली: लोकधुनों में रचा-बसा 400 साल पुराना रंगोत्सव!गढ़वाल की होली: मातृभाषा गढ़वाली में गूंजती सांस्कृतिक अस्मिता

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को नवग्रह में सबसे पावरफुल ग्रह माना जाता है, जो एक राशि में लंबे समय तक रहने के साथ-साथ जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य शक्ति को एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है। बुधवार को तेल अवीव पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देश एक ऐसे ऐतिहासिक रक्षा समझौते की दहलीज पर हैं, जो सुरक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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“फेसबुकिया” से मंच तक – ललित शर्मा की आवाज़ ने लूटी होली की महफिल

संपादकीय:रुद्रपुर में कार्यक्रमों की कमी नहीं है। यहां सांस्कृतिक संध्याएं भी होती हैं, होली मिलन…

रुद्रपुर में ध्रुव चावला को न्याय दिलाने के लिए विशाल कैंडल मार्च

रुद्रपुर में ध्रुव चावला को न्याय दिलाने के लिए विशाल कैंडल मार्च,उधम सिंह नगर जनपद…

रंग, राग और रिश्तों की पुनर्स्थापना — शैल परिषद प्रांगण में खड़ी होली का सांस्कृतिक आह्वान

रुद्रपुर। जब मैदानों की रफ्तार और पहाड़ों की आत्मा एक ही सुर में गूंजेगी—संस्कृति का…

परंपरा, संस्कृति और सामूहिक उल्लास का संगम — विजयलक्ष्मी एनक्लेव में पुरुष खड़ी होली एवं महिला होली का भव्य आयोजन

रुद्रपुर। उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं में होली  लोकजीवन की आत्मा का उत्सव , विशेष रूप…

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कुमाऊं की होली: लोकधुनों में रचा-बसा 400 साल पुराना रंगोत्सव!गढ़वाल की होली: मातृभाषा गढ़वाली में गूंजती सांस्कृतिक अस्मिता

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि को नवग्रह में सबसे पावरफुल ग्रह माना जाता है, जो एक राशि में लंबे समय तक रहने के साथ-साथ जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।

चेन्नई। इस टी-20 विश्व कप में भारत के बल्लेबाज 11 बार शून्य पर आउट हुए हैं। दूसरी किसी भी टीम के साथ ऐसा नहीं हुआ है। भारतीय बल्लेबाजों का इस टूर्नामेंट में रन बनाने का औसत 20 का है जो सुपर-8 में पहुंचने वाली टीमों में छठे नंबर पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य शक्ति को एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है। बुधवार को तेल अवीव पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देश एक ऐसे ऐतिहासिक रक्षा समझौते की दहलीज पर हैं, जो सुरक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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चेन्नई। इस टी-20 विश्व कप में भारत के बल्लेबाज 11 बार शून्य पर आउट हुए हैं। दूसरी किसी भी टीम के साथ ऐसा नहीं हुआ है। भारतीय बल्लेबाजों का इस टूर्नामेंट में रन बनाने का औसत 20 का है जो सुपर-8 में पहुंचने वाली टीमों में छठे नंबर पर है।

भारतीय बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 138 है। यह स्थिति तब है जब भारतीय टीम ने इस क्रिकेट चक्र में…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य शक्ति को एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है। बुधवार को तेल अवीव पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देश एक ऐसे ऐतिहासिक रक्षा समझौते की दहलीज पर हैं, जो सुरक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

इस बार जोर हथियारों की खरीद पर नहीं, बल्कि उन ‘एक्सक्लूसिव’ तकनीकों के हस्तांतरण पर है, जिन्हें इजरायल ने अब…

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ईजरायल और भारत की दोस्ती सिर्फ आधुनिक रक्षा सौदों, व्यापार और कूटनीति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें इतिहास के उस दौर से जुड़ी हैं जब दोनों ही देश अपने वजूद और आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे.

दफ्तरों में दबंगई पर शिकंजा: नई SOP से बदलेगी राजनीतिक संस्कृति या बढ़ेगा टकराव?

SKOCH Award की चमक या पहाड़ों की सिसकियाँ? — जब खनन पर सवालों के बीच सरकार जश्न में, और जनता पूछ रही है: क्या अवॉर्ड से ढक जाएंगे पर्यावरण के घाव? (SKOCH Group सम्मान पर उठते तीखे प्रश्न)

बार काउंसिल में नई जिम्मेदारी: वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. शर्मा का निर्वाचित होना क्यों महत्वपूर्ण है?

“फेसबुकिया” से मंच तक – ललित शर्मा की आवाज़ ने लूटी होली की महफिल

संपादकीय:रुद्रपुर में कार्यक्रमों की कमी नहीं है। यहां सांस्कृतिक संध्याएं भी होती हैं, होली मिलन समारोह भी, कवि सम्मेलन भी और राजनीतिक रंगों से सराबोर मंच भी। हर आयोजन में…

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रुद्रपुर में ध्रुव चावला को न्याय दिलाने के लिए विशाल कैंडल मार्च

रुद्रपुर में ध्रुव चावला को न्याय दिलाने के लिए विशाल कैंडल मार्च,उधम सिंह नगर जनपद के मुख्यालय रुद्रपुर में दिवंगत युवा ध्रुव चावला की आत्मिक शांति एवं परिजनों को न्याय…

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रंग, राग और रिश्तों की पुनर्स्थापना — शैल परिषद प्रांगण में खड़ी होली का सांस्कृतिक आह्वान

रुद्रपुर। जब मैदानों की रफ्तार और पहाड़ों की आत्मा एक ही सुर में गूंजेगी—संस्कृति का पुनर्जन्म  आगामी 1 मार्च 2026 को शैल परिषद प्रांगण में शैल सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित…

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परंपरा, संस्कृति और सामूहिक उल्लास का संगम — विजयलक्ष्मी एनक्लेव में पुरुष खड़ी होली एवं महिला होली का भव्य आयोजन

रुद्रपुर। उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं में होली  लोकजीवन की आत्मा का उत्सव , विशेष रूप से कुमाऊं अंचल की खड़ी होली अपनी विशिष्ट शैली, शास्त्रीयता और सामूहिकता के कारण देशभर…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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ताकि सनद रहे उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ,Hindustan Global Times, अवतार सिंह बिष्ट ,ताकि सनत रहे, उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनउत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन, उत्तराखण्ड राज्य के बनने से पहले की वे घटनाएँ हैं जो […]

9 अगस्त को गर्जेगी राज्य आंदोलनकारियों की आवाज ,परेड ग्राउंड देहरादून से मुख्यमंत्री आवास कुच,

उत्तराखंड राज्य आंदोलन की एक अवधारणा थी ।हमारे मूल अधिकार सुरक्षित होंगे ।पहाड़ी राज्य अस्तित्व में आएगा। जल, जंगल, जमीन, स्वास्थ, शिक्षा, नौकरी, संस्कृति, पौराणिक अध्यात्मिक केंद्रों पर हमारा एकाधिकार […]

भारतीय वायु सेना ने पहली बार पाकिस्तान पर ऐसा हमला किया है, जिसका जिक्र इतिहास की किताबों में किया जाएगा। भारत के साथ साथ दुनिया भी इस बात से हैरान है कि कैसे पांच घंटे के अंदर डिनर में पूरा पाकिस्तान भारतीय सेना प्लेट में रखकर खा गई।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान केवल 180 मिनट में पाकिस्तानी वायु सेना के 20 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने वाली भारतीय वायुसेना ने एक ऐसा खेल कर दिया है जो हर […]