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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की ओर से पीसीएस मुख्य परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आज जारी किए जाएंगे। जो उम्मीदवार यूके पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए थे और मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

जीन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, उनमें केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी अकेले और सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सभी राज्यों में पार्टी किसी न किसी गठबंधन के साथ चुनावी रण में है, फिर भी ये सस्पेंस बना हुआ है कि पार्टी के सबसे बड़े चेहरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं?

“मानवता की मौत या सिस्टम की नाकामी? किच्छा की घटना ने दोनों पर खड़े किए सवाल

मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किया जाएगा। ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को तत्काल रोकने आदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में यातायत की पूरी तरह से नाकेबंदी की जाएगी। ट्रंप…

डिल ईस्ट में एक तरफ शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना (IDF) पर आरोप लग रहे हैं कि वह रणनीतिक रूप से पूरे के पूरे गांवों का नामो-निशान मिटा रही है.

‘गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर भारी मात्रा…

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा; पाकिस्तान की सक्रियता से हालात और गंभीर

मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच…

ईरान-इज़रायल संघर्ष अब अमेरिका-ईरान आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील

मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब केवल ईरान और इज़रायल के बीच सीमित नहीं रह गया…

दुनिया

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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की ओर से पीसीएस मुख्य परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड आज जारी किए जाएंगे। जो उम्मीदवार यूके पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए थे और मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

जीन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, उनमें केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस पार्टी अकेले और सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बाकी सभी राज्यों में पार्टी किसी न किसी गठबंधन के साथ चुनावी रण में है, फिर भी ये सस्पेंस बना हुआ है कि पार्टी के सबसे बड़े चेहरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं?

“मानवता की मौत या सिस्टम की नाकामी? किच्छा की घटना ने दोनों पर खड़े किए सवाल

मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

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मिशन 2027 पर भारी पड़ा पिथौरागढ़ कांड: आईपीएस लोकेश्वर सिंह पर एफआईआर के आदेश से सरकार की छवि पर सवाल

पिथौरागढ़।उत्तराखंड में सत्तारूढ़ दल के बहुप्रचारित “मिशन 2027” के बीच पिथौरागढ़ से आई एक सनसनीखेज खबर ने सरकार की कानून-व्यवस्था…

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#फेक_काउंटर_की_कहानी : रणवीर सिंह से मिशन 2027 तक, सिस्टम की सच्चाई का काला आईना

उत्तराखंड,साल 2009…देहरादून की सड़कों पर सामान्य दिन जैसा माहौल था। पहाड़ की शांति, राजधानी की हलचल, रोजगार की तलाश में…

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उत्तराखंड में पाकिस्तानी जासूसों की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही हैं। कुछ वर्षों में उत्तराखंड पुलिस व केंद्रीय एजेसियों ने ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जोकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।

हल्द्वानी में किसानों की पहल: पूरे उत्तराखंड के लिए बनेगी बहुउद्देशीय सहकारी समिति

“आरोपों से ‘क्लीन चिट’ तक: रुद्रपुर रिंग रोड पर मीडिया का यू-टर्न और उठते सवाल”

“रुद्रपुर रिंग रोड: विकास का सपना या भ्रष्टाचार की दलदल?”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद किया जाएगा। ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को तत्काल रोकने आदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में यातायत की पूरी तरह से नाकेबंदी की जाएगी। ट्रंप का यह आदेश इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की सीजफायर समझौते पर बातचीत फेल होने…

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डिल ईस्ट में एक तरफ शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना (IDF) पर आरोप लग रहे हैं कि वह रणनीतिक रूप से पूरे के पूरे गांवों का नामो-निशान मिटा रही है.

'गार्जियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर भारी मात्रा में विस्फोटक लगाकर उन्हें रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ा दिया है. अवतार सिंह बिष्ट |…

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मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा; पाकिस्तान की सक्रियता से हालात और गंभीर

मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई करीब 21 घंटे लंबी अहम वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त…

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ईरान-इज़रायल संघर्ष अब अमेरिका-ईरान आमने-सामने की लड़ाई में तब्दील

मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब केवल ईरान और इज़रायल के बीच सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का रूप लेता…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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संपादकीय: जल प्रबंधन की चेतावनी है कल्याणी नदी का उफान

रुद्रपुर की हृदयरेखा कही जाने वाली कल्याणी नदी एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखा चुकी है। बीते दिनों भारी बारिश के बाद अटारिया पुल और जगतपुरा क्षेत्र में जलभराव […]

07 अगस्त 2025 के लिए उधम सिंह नगर जिले का मॉनसून डेली मॉर्निंग रिपोर्ट?उधम सिंह नगर में बादलों की छांव, अधिकांश नदियां सामान्य स्थिति में –

रुद्रपुर, 7 अगस्त 2025 (DEOC रिपोर्ट)जिले में मॉनसून की सक्रियता के बीच बुधवार रात तक अधिकतर क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष […]

मंगलम स्वीट और मिलावट के खिलाफ जनचेतना?रक्षा बंधन अभियान के तहत सिडकुल में मिठाई प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण, नमूने लिए गए

रुद्रपुर, 6 अगस्त 2025।रक्षा बंधन पर्व के दृष्टिगत मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने हेतु जिला प्रशासन व खाद्य सुरक्षा विभाग ने संयुक्त अभियान चलाते हुए आज सिडकुल सेक्टर-6 स्थित मंगलम फूड […]

सचेतना आत्मोत्थान दिवस” – साहित्य और अध्यात्म का दिव्य संगम

रुद्रपुर/ऑनलाइन | 4 अगस्त 2025भारतीय सनातन परंपरा, आत्मानुशासन और साहित्यिक चेतना को समर्पित साहित्यिक सचेतना एवं स्वास्तिक मासिक पत्रिका द्वारा सोमवार, 4 अगस्त को “सचेतना आत्मोत्थान दिवस” का भव्य आयोजन […]

रुद्रपुर की गलियों में गूंज रही ‘TALASH’ वेब सीरीज़ की शूटिंग – शहर के CA जयप्रकाश अग्रवाल के ऑफिस में फिल्माया गया महत्वपूर्ण दृश्य

रुद्रपुर, 6 अगस्त 2025।उत्तराखंड के रुद्रपुर शहर में इन दिनों कला, सिनेमा और रचनात्मकता की एक नई लहर दौड़ रही है। वेब सीरीज़ TALASH की शूटिंग शहर के अलग-अलग लोकेशनों […]

संपादकीय: सिकुड़ती कल्याणी नदी – विकास या विनाश की कीमत?

उत्तराखंड राज्य गठन से पहले कल्याणी नदी रुद्रपुर की पहचान हुआ करती थी। लगभग 100 मीटर चौड़ी यह नदी वर्षाजल को समेटने में सक्षम थी और आसपास की भूमि को […]

संपादकीय: जब कल्याणी नदी बन गई पीड़ा की प्रतीक(रुद्रपुर की त्रासदी और लापता सूरज की खोज)

रुद्रपुर की कल्याणी नदी इन दिनों दुख और त्रासदी की प्रतीक बन चुकी है। भारी बारिश के बाद उफनाई इस नदी ने शहर के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया […]

संपादकीय लेखकल्याणी नदी: हर साल की त्रासदी, हर साल की खामोशी✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर

प्रशासन हर बार “अलर्ट मोड” की बातें करता है, लेकिन नतीजे शून्य रहते हैं। कोई स्थायी समाधान नहीं, कोई प्रभावी तटबन्ध नहीं, और न ही समय रहते राहत सामग्री की […]

उत्तरकाशी की त्रासदी: प्रकृति के प्रतिशोध और सरकार की निष्क्रियता का भयावह परिणाम

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद और समस्त राज्य आंदोलनकारियों की पीड़ा और प्रश्न,धरती फिर कराह उठी। उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई भीषण त्रासदी ने न सिर्फ पहाड़ों की रगों […]

रुद्रपुर,शैल परिषद सम्पूर्ण प्रदेश के साथ इस दुःख की घड़ी में एकजुट खड़ी है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सभी प्रभावितों को शक्ति दे और लापता लोगों की कुशलता से वापसी सुनिश्चित हो।

शोक संवेदनाशैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद), रुद्रपुर ?उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में बादल फटने की भीषण आपदा ने सभी को स्तब्ध और व्यथित कर दिया है। इस अप्रत्याशित त्रासदी […]