उत्तराखंड के मोतीचूर में पुश्तैनी जमीन में हिस्सा नहीं मिलने से नाराज एक बेटी ने अपने प्रेमी के हाथों मां की हत्या कराई थी। पुलिस ने शनिवार को इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी बेटी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया।

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पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

एसपी जया बलोनी ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मोतीचूर स्थित भगत सिंह कॉलोनी में 21 सितंबर को 65 वर्षीय खजानी देवी किराये के कमरे में बारूथम में मृत पड़ी मिली थी। उनके शरीर पर चोट के निशान नहीं थे, लेकिन कमरे का ताला बाहर से बंद था।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

खजानी देवी के बेटे संजय पुंडीर निवासी ग्राम काटल रानीपोखरी की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस को जांच में पता चला कि खजानी की बेटी शिल्पा थापा निवासी नई बस्ती मोतीचूर का मां से पुश्तैनी जमीन को लेकर विवाद था। हत्या से पहले और बाद में शिल्पा का प्रेमी शिव नारायण पांडे उर्फ सोनू निवासी सम्राट कॉलोनी करोंदी भगवानपुर हरिद्वार भी सीसीटीवी कैमरों में खजानी के कमरे के आसपास दिखा था।

एसपी ने बताया कि शक में पुलिस ने उसकी तलाश को हरिद्वार और आसपास के 500 होटलों के साथ आश्रम खंगाले। आरोपी भूपतवाला में एक आश्रम में छिपा मिला। एसपी ने बताया कि शिव नारायण ने पूछताछ में शिल्पा के कहने पर खजानी देवी की हत्या करने की बात कबूली।

पति से तलाक, दूसरी शादी रचाई

आरोपी शिल्पा का वर्ष 2016 में अपने पहले पति से तलाक हो चुका था। इसके बाद 2017 में उसने दूसरी शादी की थी। उसका एक छह साल बेटा भी है। इसी साल मार्च में भूपतवाला के एक होटल में काम करते हुए वह शिव नारायण के संपर्क में आई। दोनों के बीच यह जान-पहचान धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। शिल्पा ने अपने प्रेमी शिव नारायण को काटल में स्थित पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलने की बात बताई। इसके बाद दोनों ने मां की हत्या की साजिश रची।

कर्ज में डूबा था शिव नारायण

जुलाई महीने में शिव नारायण हरिद्वार की नौकरी छोड़ मुंबई चला गया था। जब शिल्पा की मां खजानी देवी ने पुश्तैनी जमीन को बेचने की कोशिश की, तो शिल्पा ने प्रेमी शिव को मुंबई से वापस बुला लिया। शिव लॉकडाउन में 50 लाख रुपये कर्जे में डूब गया था। इसके चलते उसे करोंदी में अपना मकान तक बेचना पड़ा था। अंत में उस पर 10 लाख की देनदारी थी।


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