

आपको बता दें कि साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा.

भारत में जब भी चंद्रग्रहण लगता है, उसके साथ धार्मिक मान्यताओं और पुराणों की कथाएं जरूर याद की जाती हैं. मान्यता है कि ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि इसका संबंध सीधे राहु और केतु से जुड़ा हुआ है. पुराणों के अनुसार, जब भी राहु सूर्य या चंद्रमा को ग्रस लेता है, तब ग्रहण होता है. इस मान्यता की जड़ें समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा से जुड़ी हैं.
।✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
चंद्रग्रहण और धार्मिक मान्यताएं
कथा के मुताबिक, देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस मंथन से अमृत कलश निकला, जिसे पाकर सभी अमर होना चाहते थे. भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत बांटना शुरू किया. लेकिन दानवों में से एक राहु ने भेष बदलकर देवताओं के बीच बैठकर अमृत पी लिया.
सूर्य और चंद्र ने राहु की चालाकी पहचान ली और इसकी सूचना विष्णु को दी. विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया. चूंकि राहु ने अमृत पी लिया था, वह मरा नहीं. उसका सिर ‘राहु’ और धड़ ‘केतु’ के नाम से अमर हो गया.
सूर्य-चंद्र से राहु की दुश्मनी
कहते हैं कि सूर्य और चंद्र की शिकायत के कारण राहु इन्हें अपना शत्रु मानता है. इसी द्वेष की वजह से वह समय-समय पर सूर्य और चंद्र को निगलने की कोशिश करता है, जिसे हम ग्रहण के रूप में देखते हैं.
धार्मिक मान्यताओं में राहु-केतु को ग्रहण का कारण बताया गया है, जबकि खगोलशास्त्र इसे पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से जोड़कर समझाता है. लेकिन आज भी भारत में ग्रहण से जुड़ी यह पौराणिक कथा उतनी ही लोकप्रिय है, जितनी हजारों साल पहले थी.
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जबकि, इसकी समाप्ति रात 1 बजकर 26 मिनट पर होगी. ऐसे में इस चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट की होगी. कई बार ग्रहण के दौरान लोगों को जरूरी काम से बाहर निकलना होता है. ग्रहण के दौरान कई लोग ट्रेन, प्लेन या बस में यात्रा पर होते हैं, जबकि कुछ लोग घूमने-फिरने या मार्केट किसी जरूरी काम से गए होते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर ग्रहण के दौरान किसी जरूरी काम से घर से बाहर निकलना पड़ जाए तो क्या करना चाहिए, क्योंकि ग्रहण का प्रभाव पूरी पृथ्वी पर होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ग्रहण के दौरान घर के बाहर रहने पर गर्भवती, महिला बच्चे, बुजुर्ग और आम लोगों को क्या करना चाहिए.
ग्रहण के समय बाहर जाना पड़े तो क्या करें?
मंत्र जप या नामस्मरण- ग्रहण के दौरान अगर घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी हो जाए तो उस दौरान मन ही मन भगवान का नाम लें या ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय’ इस मंत्र का मन ही मन जाप करना चाहिए. ऐसा करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता.
कुश या तुलसी पत्र साथ रखें- शास्त्रों में माना गया है कि कुश या तुलसी पत्र नकारात्मक प्रभाव से रक्षा करते हैं. ऐसे में अगर आप भी ग्रहण के दौरान घर के बाहर रहें तो अपने पास कुश और तुलसी के पत्ते साथ रखें. दरअसल, कुश और तुलसी ग्रहण के प्रभाव को नष्ट कर देता है.
सिर ढककर रहें- शास्त्रों में गर्भवती महिला बच्चे और बुजुर्ग के लिए खास नियम बताए गए हैं. वैसे तो ग्रहण के दौरान इन लोगों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, लेकिन अगर ऐसा करना बहुत जरूरी हो तो ऐसे में गर्भवती महिला, बच्चे और बुजुर्ग कपड़े या दुपट्टे से सिर को ढककर रखें. ऐसा करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है.
ताबीज या रक्षा सूत्र- शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान अगर परिवार के बुजु्र्ग और बच्चे घर से बाहर निकले तो उन्हें काला धागा या रक्षा सूत्र बांधकर ही ऐसा करना चाहिए. कहा जाता है कि रक्षा सूत्र ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचाता है.
खाना न खाएं- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई ग्रहण के दौरान घर से बाहर यात्रा पर है, बाजार में है या घूमने के लिए निकला है तो उन्हें इस दौरान भोजन करने से परहेज करना चाहिए. ग्रहण के दौरान खाना-खाना वर्जित है. क्योंकि, ग्रहण का अशुभ प्रभाव भोजन पर भी पड़ता है.
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष नियम
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं पेट पर हल्का सा कपड़ा (दुपट्टा/शॉल) बांधकर रखें.
कोई नुकीली वस्तु जैसे सेफ्टी पिन या चाकू अपने पास रखने की परंपरा है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा का असर कम हो. हालांकि, इन चीजों से कोई काम नहीं करने चाहिए. इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है.
गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने से पहले संतान गोपाल मंत्र का जाप और प्रार्थना करते हुए ही निकलें. संतान गोपाल मंत्र- “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः”
बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष नियम
ग्रहण के दौरान बुजुर्ग और बच्चों को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए. अगर ऐसा करना जरूरी हो तो सिर ढककर और तुलसी पत्ती या कुश साथ रखकर जाएं. बुजुर्ग और बीमार लोग अपने साथ पानी की छोटी बोतल रखें और रास्ते में हनुमान चालीसा या सरल मंत्रों का जाप करते रहें.




