अधिकारियों के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद सुरक्षा और दमकल टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
यूएई की फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने भी बयान जारी कर कहा कि परमाणु संयंत्र की सभी महत्वपूर्ण प्रणालियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और रेडियोलॉजिकल सुरक्षा स्तर पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है. यानी न्यूक्लियर रिएक्टर और उससे जुड़े संवेदनशील सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं. बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट यूएई की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है. ऐसे में ड्रोन हमले की यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकती है. हालांकि अधिकारियों ने फिलहाल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है.
ड्रोन हमले से इलेक्ट्रिक जनरेटर में लगी आग
अबू धाबी के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहर ड्रोन हमले के बाद एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में आग लग गई. अधिकारियों के मुताबिक यह आग प्लांट की आंतरिक सुरक्षा सीमा के बाहर लगी थी. घटना के तुरंत बाद राहत और सुरक्षा टीमें मौके पर पहुंचीं और हालात को नियंत्रण में ले लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है और रेडिएशन या परमाणु सुरक्षा स्तर पर भी कोई असर नहीं पड़ा. एहतियात के तौर पर सभी जरूरी सुरक्षा कदम उठाए गए हैं.
FANR बताया न्यूक्लियर प्लांट पूरी तरह सुरक्षित
यूएई की फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने स्पष्ट किया कि आग का असर न्यूक्लियर पावर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था या उसके जरूरी सिस्टम्स पर नहीं पड़ा है. प्लांट की सभी यूनिट्स सामान्य रूप से काम कर रही हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट खबरें साझा करने से बचें.
संदिग्ध ड्रोन के पीछे किसका हाथ?
जारी किए गए बयान में यह नहीं बताया गया कि संदिग्ध ड्रोन हमले के पीछे किसका हाथ था. इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के दौरान UAE कई बार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है. अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कुछ हमले ईरान की ओर से किए गए थे, जिनका निशाना ऊर्जा प्रतिष्ठान और समुद्री ढांचा थे.
