उत्तराखंड बनने के बाद नैनीताल में सबसे तेज बढ़ी मुस्लिम आबादी, 10 साल में 39% इजाफा; ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्धि दर 61% तक पहुँची

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी।
राज्य गठन के 25 वर्षों में उत्तराखंड के जनसांख्यिकीय स्वरूप में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है। सांख्यिकी पत्रिका में शामिल जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि नैनीताल जिला जनसंख्या परिवर्तन का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2001 से 2011 के बीच जहां जिले की कुल आबादी 25.12 प्रतिशत बढ़ी, वहीं मुस्लिम आबादी में रिकॉर्ड 39 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इसकी तुलना में हिंदू आबादी की वृद्धि दर 23.56 प्रतिशत और सिख समुदाय की केवल 8.14 प्रतिशत रही। यह डेटा धार्मिक जनसंख्या के अनुपात में तेज फेरबदल की ओर संकेत करता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

साल 2001 की जनगणना में जिले की जनसंख्या 7,62,909 थी, जो 2011 में बढ़कर 9,54,605 तक पहुँच गई। वर्ष 2001 में कुल आबादी में हिन्दुओं की हिस्सेदारी 85.89 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 84.82 प्रतिशत हुई। इसके उलट मुस्लिम आबादी 2001 में 11.34 प्रतिशत थी, जो दस वर्षों में बढ़कर 12.65 प्रतिशत हो गई। आंकड़ों के अनुसार ईसाई आबादी में भी 39.53 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सिख, जैन और अन्य समुदायों में वृद्धि सीमित पाई गई। धर्म न बताने वाले लोगों की संख्या में 120 प्रतिशत से अधिक इजाफा दर्ज हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक वृद्धि, शहरी इलाकों में भी तेज

जनगणना रिपोर्ट यह भी बताती है कि नैनीताल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर सबसे अधिक रही।
वर्ष 2001 में ग्रामीण क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या 13,304 थी, जो 2011 में बढ़कर 21,454 तक पहुँच गई — यानी 61.25 प्रतिशत वृद्धि
वहीं शहरी क्षेत्रों में यह संख्या 73,228 से बढ़कर 99,288 हुई, जो लगभग 35.58 प्रतिशत वृद्धि है।
यह रुझान यह संकेत देता है कि पिछले डेढ़ दशक में आबादी का स्थानांतरण केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से बसावट हुई है।

डोमिसाइल और फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला बढ़ा संदेह

13 नवंबर को कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत की जांच में स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने में बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद जनसंख्या में तेज वृद्धि की पृष्ठभूमि पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो पिछले कई वर्षों में ऐसे गिरोह सक्रिय रहे हैं जिन्होंने बाहरी जिलों और बाहरी राज्यों तक के लोगों को नैनीताल जिले के स्थायी निवासी के रूप में प्रमाणपत्र जारी करवाए। इस मामले में खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो चुकी हैं और जांच की दिशा नैनीताल के अलावा आसपास के जिलों तक बढ़ाई जा रही है।

अधिकारी यह आशंका भी व्यक्त कर रहे हैं कि यदि ऐसे फर्जी प्रमाणपत्र पिछले 14–20 वर्षों में बनाए गए हैं तो जनगणना के वास्तविक आंकड़ों में जनसंख्या वृद्धि कई गुना अधिक हो सकती है। इस संदर्भ में प्रशासनिक तंत्र में काफी हलचल है और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

बदलता भूगोल — बस्तियाँ और बसावट

हल्द्वानी और उससे सटे क्षेत्रों में जनसंख्या परिवर्तन का असर भौगोलिक और सामाजिक ढांचे में भी दिखने लगा है।
कभी हिंदू आबादी वाली जोशी विहार कॉलोनी अब मुस्लिम बहुल क्षेत्र बन चुकी है और स्थानीय स्तर पर इसका नाम वारसी कॉलोनी के रूप में प्रचलित हो गया है।
वहीं गौला पार क्षेत्र में एक समय केवल मुस्लिम समुदाय को एक विशेष कॉलोनी में प्लॉट देने का मामला सामने आने पर विवाद भी खड़ा हुआ था।
स्थानीय लोग इसे तेजी से बदलते सामाजिक संतुलन की मिसाल के तौर पर देखते हैं।

बढ़ती आबादी का भविष्य और चुनौतियाँ

जनसंख्या वृद्धि अपने साथ कई सवाल और जिम्मेदारियाँ लेकर आती है —
▪ आवास और बुनियादी ढांचे पर दबाव
▪ रोजगार और संसाधनों का बंटवारा
▪ स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून व्यवस्था पर बोझ
▪ प्रवासन और बाहरी बसावट का सामाजिक प्रभाव

समाज विज्ञानियों का मानना है कि तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन का समुचित अध्ययन और नीति निर्धारण आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह का सामाजिक तनाव, क्षेत्रीय असंतुलन और संसाधनों पर टकराव न बढ़े।


यह रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यों, जनगणना आंकड़ों और प्रशासनिक सूचनाओं पर आधारित है — इसमें किसी धर्म या समुदाय के प्रति कोई पक्षपात नहीं है।



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