अवतार सिंह बिष्ट,बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद लालू परिवार में विवादों का सिलसिला जारी है, जिसने अब एक बड़ी राजनीतिक मोड़ ले लिया है। लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की नई पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) ने एक बड़ा ऐलान करते हुए मौजूदा एनडीए सरकार को नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है।

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यह कदम राजनीतिक गलियारों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे लालू परिवार और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से उनकी दूरी और ज्यादा स्पष्ट हो गई है। सबसे बड़ी खबर यह है कि तेज प्रताप यादव ने अपनी बहन रोहिणी आचार्य को उनकी पार्टी का राष्ट्रीय संरक्षक बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। रोहिणी आचार्य हाल ही में अपने भाई तेजस्वी यादव और उनकी कोर टीम से तीखे विवाद के बाद पटना छोड़कर दिल्ली गई हैं। यह प्रस्ताव लालू परिवार के भीतर मची सियासी और पारिवारिक कलह को एक नया आयाम देता है।

NDA में मंत्री बनेंगे तेज प्रताप? बिना शर्त पार्टी को दिया समर्थन, बहन रोहिणी के लिए बनाया ख़ास प्लान

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

NDA को ‘नैतिक समर्थन’: क्यों लिया यह फैसला?

जनशक्ति जनता दल (JJD) की हालिया बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम यादव ने मीडिया को बताया कि उनकी पार्टी ने एनडीए सरकार को नैतिक समर्थन देने का निर्णय लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, तेज प्रताप का यह कदम उनकी रणनीतिक समझ का हिस्सा है। वह RJD के टूटे गठबंधन से बाहर होने के बाद अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाना चाहते हैं और सत्ता समीकरण में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। तेज प्रताप यादव पहले ही लालू परिवार के साथ अपने राजनीतिक और पारिवारिक मतभेदों को सार्वजनिक कर चुके हैं। उन्होंने RJD को एक ‘फर्जी पार्टी’ बताते हुए दावा किया है कि उनकी जनशक्ति जनता दल ही “असली लालू यादव पार्टी” है। एनडीए सरकार को दिया गया यह समर्थन उनकी नई पॉलिटिकल पहचान को मजबूत कर सकता है और उन्हें विपक्ष की राजनीति से दूर कर सकता है।

रोहिणी आचार्य को राष्ट्रीय संरक्षक बनाने का प्रस्ताव

JJD की बैठक में तेज प्रताप यादव ने अपनी बहन रोहिणी आचार्य को लेकर एक भावनात्मक और राजनीतिक प्रस्ताव भी रखा। प्रेम यादव ने बताया कि तेज प्रताप यादव ने कहा है कि वे जल्द ही रोहिणी दीदी से इस विषय पर बात करेंगे और उनसे उनकी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक बनने की विनती करेंगे। यह प्रस्ताव उस समय आया है जब रोहिणी आचार्य पारिवारिक विवाद के चलते पटना से दिल्ली चली गई हैं। तेज प्रताप का यह कदम न केवल अपनी बहन को सम्मान देने का प्रयास है, बल्कि लालू परिवार के अंदरूनी विवाद के बीच रोहिणी को एक राजनीतिक मंच देने की कोशिश भी मानी जा रही है। यदि रोहिणी आचार्य इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती हैं, तो यह लालू परिवार में चल रहे संघर्ष को खुलेआम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में बदल सकता है, जिससे आने वाले समय में बिहार की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


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