

रूद्रपुर/हल्द्वानी 1 दिसम्बर 2025।पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं प्रमुख राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु के नेतृत्व में जमरानी बांध निर्माण कम्पनी के कार्यालय पर ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों नौजवानों ने आज उग्र आंदोलन करते हुए जोरदार घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय युवाओं को 100 प्रतिशत रोजगार, स्थानीय वाहनों की भागीदारी, तथा छोटे-बड़े सभी कार्यों में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता देने की ठोस मांग रखी। साथ ही कोई भी काम बिना सिफारिश दिए, दलाली प्रथा पूरी तरह बंद करने, तथा खनन माफियाओं के दबाव में काम न करने की चेतावनी कम्पनी प्रबंधन को दी।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने कम्पनी के प्रबंधक मंडल को लगभग तीन घंटे तक कार्यालय में ही घेरकर बंधक बनाए रखा। तीखे विरोध और नारेबाज़ी के बीच कम्पनी प्रबंधन ने दो दिन के भीतर सभी मांगों पर ठोस कार्यवाही करने तथा लिखित रूप में निर्णय लागू करने का आश्वासन दिया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन में समाधान नहीं हुआ तो और अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा।
राज्य आंदोलनकारी केदार पलड़िया एवं राकी बजवासी ने कहा कि स्थानीय लोगों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कंपनी को ग्रामीणों के हित में कार्य करना ही होगा। उन्होंने साफ संदेश दिया कि जमरानी परियोजना स्थानीय जनता की जमीन, अधिकार और भविष्य पर बनी है, इसलिए इसमें बाहरी ठेकेदारों और सिफारिश तंत्र की कोई जगह नहीं है।
आंदोलन में मुख्य रूप से शामिल रहे —
क्षेत्र पंचायत सदस्य हरीश पलड़िया, अमिया डहरा, क्षेत्र पंचायत सदस्य नवीन पांडे, मिदुल शाह, प्रकाश आय, प्रधान डहरा मनोज चनौतिया, संजय पलड़िया, ललित भट्ट, मोहित महरा, हिमांशु महरा, सरपंच रोशिल, खष्टी दत्त पाण्डेय, सुमित महरा, मनीष दुमका, सुमित आय, उमेश पांडे, पुरन पलड़िया, भैरव दत्त पलड़िया, कमलेश पलड़िया, सुमित रावत, छात्र नेता विकास पांडे, भुवन चंद्र पलड़िया, राजकुमार पाण्डेय, अजय महरा, पवन महरा, मयंक महरा, कमलेश पलड़िया, कमल पांडे, गणेश दत्त भट्ट, राजू पांडे, ललित मोहन, बबलू महरा, भगवान महरा सहित सैकड़ों ग्रामीण साथी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
आंदोलन के बाद ग्रामीण युवाओं में उत्साह और एकजुटता दिखाई दी, वहीं कंपनी प्रबंधन पर ग्रामीण हित में कार्य करने का दबाव अब और अधिक बढ़ गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर समाधान नहीं हुआ तो आगामी संघर्ष और भी व्यापक होने की पूरी संभावना है।




