रील के जुनून में उजड़ा एक पूरा परिवार, कैंची धाम की आस्था, फेसबुक की रील और तीन जिंदगियों का अंत

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छह महीने से जिस कैंची धाम दर्शन की योजना बनाई जा रही थी, वही यात्रा एक परिवार के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गई। नैनीताल जनपद के भवाली–कैंची धाम मार्ग पर निगलाट के समीप स्कॉर्पियो कार के खाई में गिरने से बरेली की तीन महिलाओं—मां, पत्नी और साली—की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर समाज को आईना दिखा दिया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

यह केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि लापरवाही, दिखावे और सोशल मीडिया के अंधे जुनून का परिणाम थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बरेली निवासी राहुल पटेल अपने परिवार के साथ कैंची धाम दर्शन को जा रहे थे। वाहन उनका बहनोई चला रहा था। बताया जा रहा है कि रास्ते में फेसबुक रील बनाने के दौरान पत्नी के कहने पर ड्राइविंग के दौरान स्टेयरिंग थमाई गई, एक्सीलेटर ज्यादा दबा और कुछ ही सेकंड में स्कॉर्पियो करीब 50 मीटर गहरी खाई में समा गई।

परिणाम—
गंगा देवी (56), बृजेश कुमारी (26) और नैंसी गंगवार (24) की मौके पर ही मौत।
7 वर्षीय मासूम बच्चे सहित छह लोग गंभीर रूप से घायल।

आस्था के रास्ते पर असावधानी का कहर

विडंबना यह है कि लोग जिस देवभूमि उत्तराखंड को शांति और श्रद्धा के लिए चुनते हैं, वहीं पहाड़ी सड़कों पर ज़रा-सी लापरवाही जीवन छीन लेती है। संकरे मोड़, गहरी खाइयाँ और ऊंचाई—यहां ड्राइविंग अनुशासन नहीं, जिम्मेदारी मांगती है।

लेकिन आज ड्राइविंग सीट पर बैठा व्यक्ति सड़क नहीं, मोबाइल देख रहा है।
स्टेयरिंग पर हाथ कम, कैमरे पर ध्यान ज्यादा है।

रील संस्कृति: मनोरंजन या मौत का न्योता?

आज सोशल मीडिया पर “लाइक”, “व्यू” और “रील” की होड़ ने इंसानी समझ को कुंद कर दिया है।
रेल, बस, बाइक और अब पहाड़ी सड़कों पर चलती कारें—सब कुछ कंटेंट बन चुका है।

यह हादसा पूछता है—
क्या एक रील तीन जिंदगियों से ज्यादा कीमती थी?
क्या कुछ सेकंड का वीडियो एक बच्चे से उसकी मां छीनने का हक देता है?

कानून और चेतावनी दोनों जरूरी

यह समय केवल शोक व्यक्त करने का नहीं, बल्कि सख्त संदेश देने का है—

  • ड्राइविंग के दौरान वीडियो बनाना अपराध घोषित हो
  • पहाड़ी क्षेत्रों में निगरानी और चेकिंग बढ़े
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी खतरनाक रील्स पर जवाबदेह हों

कैंची धाम के बाबा के दर्शन अधूरे रह गए, लेकिन यह हादसा समाज को एक कड़वी सीख दे गया।
अगर अब भी नहीं चेते, तो अगली खबर किसी और परिवार की हो सकती है।

रील दोबारा बन सकती है,
लेकिन मां, पत्नी और साली कभी वापस नहीं आतीं।



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