

रुद्रपुर/दिल्ली।हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की विशेष रिपोर्ट के बाद पासपोर्ट और वीज़ा फर्जीवाड़े का बड़ा जाल बेनकाब हो गया है। पंजाब के फिरोज़पुर निवासी ताजिंदर सिंह के पासपोर्ट और कनाडा वीज़ा का दुरुपयोग कर दूसरे व्यक्ति को विदेश भेजने का मामला अब तिहाड़ जेल तक पहुँच चुका है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, प्रिंट मीडिया शैल ग्लोबल टाइम्स (अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद) प्रदेश प्रवक्ता श्रमजीवी पत्रकार यूनियन

मामला क्या है?
ताजिंदर सिंह (जन्म 04/10/2004, पासपोर्ट संख्या – 7234737) के नाम पर जारी वैध कनाडाई वीज़ा का इस्तेमाल गुरफिंदर सिंह नामक युवक ने दलालों के जरिए किया। बताया गया कि इस पूरे फर्जीवाड़े के लिए 20 लाख रुपये की वसूली हुई, और असली पासपोर्ट धारक को चुप कराने के लिए 10 लाख रुपये का “सेटलमेंट” प्रस्ताव रखा गया।
एजेंसियों और दलालों का नेटवर्क
इस फर्जीवाड़े में जिन एजेंसियों के नाम सामने आए हैं उनमें —
- MOVE Overseas
- CAPART Overseas (आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स, काशीपुर बाईपास, रुद्रपुर, तरुण जुनेजा की संपत्ति स्थित कार्यालय)
दलालों के नाम – दलविंदर सिंह, कर्मनदीप औलख ,
दिल्ली से गिरफ्तारी, तिहाड़ पहुँचे आरोपी
24 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने MOVE Overseas से जुड़े तालविंदर रंधावा और कर्मनदीप औलख को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी पासपोर्ट और वीज़ा जारी कर गुरफिंदर सिंह को दिल्ली से इंग्लैंड भेजा, लेकिन एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन जांच में पूरा मामला पकड़ा गया। इंग्लैंड में गिरफ्तार होने के बाद उसे डिपोर्ट कर दिल्ली लाया गया और आरोपी दलालों को भी तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
फर्जीवाड़े का गढ़ बना MOVE Overseas
जानकारी के अनुसार MOVE Overseas, जिसका संचालन तरुण जुनेजा की आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स (काशीपुर बाईपास, रुद्रपुर) स्थित संपत्ति से होता है, लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों का अड्डा बना हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, कर्मनदीप औलख, तालविंदर रंधावा, गैरी रंधावा और तरुण जुनेजा इस पूरे नेटवर्क को संचालित करते थे, जिसमें फर्जी पासपोर्ट, वीज़ा और फर्जी पहचान पत्र बनाकर लोगों को विदेश भेजने का धंधा चलता रहा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट का असर इतना गहरा हुआ कि दिल्ली पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। इससे साफ हो गया है कि रुद्रपुर से लेकर पंजाब और दिल्ली तक फैले इस फर्जीवाड़े के तार बेहद मजबूत हैं और इसकी जांच व्यापक
यह मामला न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देशभर की इमीग्रेशन एजेंसियों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि कैसे सरकारी विभागों की आँखों में धूल झोंक कर फर्जीवाड़े का ऐसा जाल बिछाया गया। अब मांग उठ रही है कि आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स से संचालित इस नेटवर्क की पूरी जांच हो और मालिक तरुण जुनेजा की भूमिका पर भी कार्रवाई की जाए।
मूव ओवरसीज का फर्जीवाड़ा उजागर: दो गिरफ्तार, जालसाजी का अड्डा बना ऑफिस
दिल्ली। राजधानी में इमिग्रेशन फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है। मूव ओवरसीज (MOVE Overseas) नामक फर्म के संचालकों तालविंदर रंधावा और कर्मनदीप औलख को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया है। दोनों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी पासपोर्ट और वीज़ा जारी कर विदेश भेजने का धंधा खड़ा कर रखा था।
जानकारी के अनुसार, मूव ओवरसीज ने एक शख्स को फर्जी वीज़ा और अलग फोटो वाले पासपोर्ट के जरिए इंग्लैंड भेजा। दिल्ली से उड़ान भरने के बाद वह व्यक्ति इंग्लैंड एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच में पकड़ लिया गया और वहीं से उसे डिपोर्ट कर वापस दिल्ली भेजा गया। यहां आते ही दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
सूत्रों के अनुसार, यह धंधा आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स स्थित तरुण जुनेजा (प्रॉपर्टी डीलर) के ऑफिस से संचालित होता था। इस गोरखधंधे में चार लोगों के नाम सामने आए हैं—कर्मनदीप औलख, तालविंदर रंधावा, गैरी रंधावा और तरुण जुनेजा। यह गिरोह न केवल फर्जी पासपोर्ट और वीज़ा तैयार करता था बल्कि नकली फोटो और फर्जी पहचान बनाकर लोगों को विदेश भेजने का धंधा कर रहा था।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मूव ओवरसीज लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त था और अब पकड़े जाने के बाद कई और खुलासे होने की संभावना है। दिल्ली पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य एजेंसियां भी इस गिरोह से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।
मूव ओवरसीज अब इमीग्रेशन फ्रॉड का अड्डा बन चुका है, जहां से करोड़ों रुपये की जालसाजी चल रही थी।
मूव ओवरसीज फर्जीवाड़ा अब गिरफ्तारी और तिहाड़ जेल तक पहुँच चुका है। 24 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने एजेंसी से जुड़े तालविंदर रंधावा और कर्मनदीप औलख को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा। आरोप बेहद गंभीर हैं—इन लोगों ने पंजाब के फिरोज़पुर निवासी ताजिंदर सिंह के वैध पासपोर्ट का दुरुपयोग कर फर्जी वीज़ा और पहचान बनाई, जिसके चलते न केवल लाखों रुपये की ठगी हुई बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए।
गिरफ्तारी की कार्रवाई तो हुई, मगर सवाल यह है कि बाकी आरोपी कैसे बच निकले? खबरों के मुताबिक़, जिन दो लोगों को पुलिस तिहाड़ भेज पाई, वहीं अन्य दो आरोपियों को छोड़ दिया गया। यदि यह सच है तो यह सिर्फ इमीग्रेशन फर्जीवाड़ा ही नहीं, आम नागरिक किस पर भरोसा करे?यह मामला केवल दो युवकों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन एजेंसियों की काली सच्चाई उजागर करता है जो विदेश जाने के सपने दिखाकर युवाओं को ठग रही हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे और दोषियों को हर हाल में सज़ा दिलाए। वरना “विदेश का सपना” आगे भी युवाओं के लिए “काला जाल” ही साबित होगा।
क्रमशः जैसे-जैसे अपडेट मिलेगी हम खबर को बढ़ते जाएंगे इसलिए इस खबर पर बने रहे




