बाल सुरक्षा की नींव मजबूत करता जागरूकता अभियान— महिला कल्याण विभाग की पहल, विस्डम पब्लिक स्कूल रुद्रपुर में सराहनीय प्रयास

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दिनांक 13 दिसंबर 2025 को महिला कल्याण विभाग द्वारा विस्डम पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर (जनपद ऊधम सिंह नगर) में चलाया गया जागरूकता अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह बच्चों के सुरक्षित, सशक्त और अधिकार-संपन्न भविष्य की दिशा में एक ठोस कदम था। ऐसे समय में जब समाज में बाल अपराध, यौन शोषण, साइबर अपराध, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं, इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशील शासन की मिसाल प्रस्तुत करते हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

विजडम पब्लिक स्कूल गंगापुर रोड रूद्रपुर

बच्चों से संवाद: जागरूकता का सबसे प्रभावी माध्यम

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जानकारी बच्चों की उम्र, समझ और मानसिक स्तर को ध्यान में रखते हुए उदाहरणों के माध्यम से दी गई। जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य श्रीमती चंद्रकला राय, चाइल्ड हेल्पलाइन की काउंसलर स्मिता, केस वर्कर रेखा अधिकारी तथा स्पोर्ट्स पर्सन दीपा राय ने मिलकर जिस सहज और संवादात्मक शैली में बच्चों से बात की, उसने इस कार्यक्रम को प्रभावी बना दिया।

विशेष रूप से गुड टच और बैड टच जैसे संवेदनशील विषय को बच्चों के सामने बिना भय पैदा किए, सरल उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत करना अत्यंत प्रशंसनीय रहा। आज भी हमारे समाज में इस विषय पर खुलकर बात करना एक तरह का ‘टैबू’ माना जाता है, जिसका खामियाजा बच्चे भुगतते हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर इस प्रकार की स्पष्ट, जिम्मेदार और वैज्ञानिक जानकारी बच्चों को आत्मरक्षा की मानसिक शक्ति प्रदान करती है।

बाल अधिकारों की जानकारी: कानून केवल किताबों तक सीमित न रहे

कार्यक्रम में बाल अधिकारों, पोक्सो एक्ट, बाल श्रम निषेध, बाल विवाह रोकथाम तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। यह एक महत्वपूर्ण पहल इसलिए भी है क्योंकि अक्सर कानून तो मौजूद होते हैं, लेकिन उनकी जानकारी बच्चों और अभिभावकों तक नहीं पहुंच पाती।

पोक्सो एक्ट जैसे सख्त कानून की जानकारी बच्चों को यह भरोसा देती है कि यदि उनके साथ कुछ गलत होता है, तो कानून उनके साथ खड़ा है। साथ ही, यह संदेश भी स्पष्ट रूप से गया कि अपराधी चाहे कोई भी हो—परिचित या अपरिचित—कानून सबके लिए समान है। यह सोच बच्चों के भीतर भय के बजाय आत्मविश्वास पैदा करती है।

1098: सिर्फ नंबर नहीं, उम्मीद की एक डोर

इस जागरूकता अभियान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में दी गई विस्तृत जानकारी रही। बच्चों को यह समझाया गया कि 1098 केवल एक फोन नंबर नहीं, बल्कि संकट में फंसे बच्चे के लिए मदद की पहली सीढ़ी है।

काउंसलर स्मिता और केस वर्कर रेखा अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि चाइल्ड हेल्पलाइन किस प्रकार बच्चों के साथ काम करती है, शिकायत आने के बाद क्या प्रक्रिया होती है और किस तरह गोपनीयता का ध्यान रखा जाता है। इससे बच्चों के मन में यह विश्वास पैदा हुआ कि शिकायत करने पर उन्हें डांटा या डराया नहीं जाएगा, बल्कि उनकी बात सुनी जाएगी।

साथ ही पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 और साइबर क्राइम नंबर 1930 की जानकारी आज के डिजिटल युग में बेहद प्रासंगिक है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराध बच्चों के लिए एक नई और खतरनाक चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में सही समय पर सही नंबर की जानकारी कई बच्चों को बड़े संकट से बचा सकती है।

विद्यालयों की भूमिका: शिक्षा से आगे सुरक्षा

इस कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ और लगभग 170 छात्र-छात्राओं की सक्रिय उपस्थिति यह दर्शाती है कि विस्डम पब्लिक स्कूल केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है।

आज आवश्यकता है कि विद्यालय केवल परीक्षा और परिणाम का केंद्र न बनें, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित संवाद स्थल बनें—जहां वे बिना डर अपनी बात रख सकें। इस प्रकार के जागरूकता अभियान विद्यालयों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

खेल, आत्मबल और आत्मरक्षा

स्पोर्ट्स पर्सन दीपा राय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक अलग ही आयाम दिया। खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मबल, अनुशासन और आत्मरक्षा की भावना को भी मजबूत करता है। बच्चों को यह संदेश देना कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकते हैं, उनके भीतर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

समाज के लिए संदेश

यह जागरूकता अभियान केवल स्कूल तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका संदेश पूरे समाज के लिए है—बच्चों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। माता-पिता, शिक्षक, प्रशासन और समाज—सभी को मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाना होगा, जहां बच्चा न डरें, न झिझके और न ही चुप रहे।

आज भी कई मामलों में बच्चों के साथ हो रहे अपराध इसलिए सामने नहीं आ पाते क्योंकि वे बोल नहीं पाते। ऐसे अभियानों के माध्यम से अगर एक भी बच्चा गलत के खिलाफ आवाज उठाने का साहस कर पाता है, तो यह प्रयास सार्थक माना जाएगा।

महिला कल्याण विभाग द्वारा विस्डम पब्लिक स्कूल, रुद्रपुर में चलाया गया यह जागरूकता अभियान एक सरकारी कार्यक्रम से कहीं बढ़कर एक सामाजिक संदेश था। यह संदेश कि बच्चे कमजोर नहीं हैं, यदि उन्हें सही जानकारी, सही मार्गदर्शन और सही समर्थन मिल जाए।

अब आवश्यकता है कि ऐसे कार्यक्रम केवल एक दिन या एक स्कूल तक सीमित न रहें, बल्कि इन्हें नियमित रूप से हर विद्यालय, हर ब्लॉक और हर गांव तक पहुंचाया जाए। क्योंकि सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।


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