बर्ड फ्लू की दस्तक: सितारगंज के बैकुण्ठपुर गाँव में 1,708 मुर्गियों की कलिंग, जिला प्रशासन ने घोषित किया संक्रमित क्षेत्र

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रुद्रपुर/सितारगंज।ऊधमसिंहनगर जिले में बर्ड फ्लू (हाईली पथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा) ने दस्तक दे दी है। सितारगंज तहसील के ग्राम बैकुण्ठपुर स्थित एक निजी मुर्गीफार्म में अचानक सैकड़ों मुर्गियों की अस्वाभाविक मौत के बाद स्वास्थ्य व पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया। भारत सरकार के अधिनियम प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ इन्फेक्शियस एंड कॉन्टेजियस डिजीज ऑफ एनिमल्स एक्ट, 2009 के तहत बर्ड फ्लू को अधिसूचित रोग घोषित किए जाने के प्रावधानों के अनुरूप, संदिग्ध नमूनों को एनआईएचएसएडी (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिज़ीज़), भोपाल भेजा गया।

दिनांक 23 अगस्त को प्राप्त लैब रिपोर्ट ने इस आशंका की पुष्टि कर दी कि मुर्गियां हाईली पथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा (HPAI) से ग्रसित थीं। इसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्यवाही करते हुए मुर्गीफार्म को एपिसेंटर मानकर 1 किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र (Infected Zone) तथा 10 किलोमीटर की परिधि को सतर्कता क्षेत्र (Surveillance Zone) घोषित कर दिया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)


प्रशासन की त्वरित कार्रवाई?24 अगस्त को जिला अधिकारी के आदेशों के तहत राजस्व विभाग, पशुपालन विभाग, नगर निकाय शक्तिगढ़ व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुँचकर 1,708 मुर्गियों की क्लिंग (Cull) की और उन्हें सुरक्षित तरीके से दीप बुरिअल (Deep Burial) किया। इसके साथ ही मुर्गीफार्म का चरणबद्ध सैनिटाइजेशन भी किया गया।

भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अगले तीन महीने तक सतर्कता क्षेत्र में पोस्ट ऑपरेटिव सर्विलांस प्लान (POSP) लागू रहेगा। इस दौरान 10 किलोमीटर की परिधि से नियमित अंतराल पर नमूने लेकर भोपाल भेजे जाएंगे और बर्ड फ्लू निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद ही क्षेत्र को Bird Flu Free Zone घोषित किया जाएगा।

आगे की रणनीति?जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देशित किया है कि कलिंग और दीप बुरिअल ऑपरेशंस में शामिल कर्मियों के साथ-साथ आसपास के सभी मुर्गीपालकों की नियमित बर्ड फ्लू स्क्रीनिंग ड्राइव चलाई जाए।

यह केवल बैकुण्ठपुर का संकट नहीं, बल्कि पूरे ऊधमसिंहनगर के लिए सतर्कता का बिगुल है।

संपादकीय दृष्टिकोण?यह घटना उत्तराखंड के लिए एक गंभीर चेतावनी है। खेती-बाड़ी के बाद पोल्ट्री उद्योग इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है, लेकिन संक्रमण का यह खतरा न केवल किसानों की आजीविका पर प्रहार है बल्कि आमजन के स्वास्थ्य से भी सीधा जुड़ा हुआ है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, परंतु यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि अगले तीन महीनों तक निगरानी तंत्र ढीला न पड़े। पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर गाँव-गाँव जाकर जागरूकता फैलानी होगी कि संक्रमण फैलने से पहले ही उसे रोक लिया जाए।



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