संपादकीय :नगला नगर पालिका भूमि सीमांकन विवाद: 750 परिवारों के भविष्य की घड़ी

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नगला नगर पालिका क्षेत्र का भूमि सीमांकन आज केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह सैकड़ों परिवारों के भविष्य, आजीविका और स्थायित्व का सवाल बन चुका है। हाल ही में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत से मुलाकात कर इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल में पालिका अध्यक्ष सचिन शुक्ला, सभासदगण एवं नगला बचाओ समिति के सदस्य शामिल रहे।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

यह चर्चा केवल अतिक्रमण और सीमांकन तक सीमित नहीं थी, बल्कि 55 वर्ष पुराने तथ्यों को सामने रखते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया गया कि न्याय केवल कागजी सर्वेक्षण से नहीं बल्कि ऐतिहासिक प्रमाणों और सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर ही संभव है।

पुराना विवाद, नया संकट

15 जून 1966 को लोक निर्माण विभाग ने नगला निवासी एक व्यक्ति को नोटिस जारी कर साफ कहा था कि सड़क के दोनों ओर 50-50 फीट भूमि विभाग की स्वामित्व वाली है और इस पर अतिक्रमण न किया जाए। इसका अर्थ है कि विभाग ने उस समय ही अपनी सीमा रेखा तय कर दी थी। सवाल यह है कि जब आधी सदी पहले ही सीमांकन हो चुका था, तो आज फिर इस विवाद को क्यों हवा दी जा रही है?

नगला नगर पालिका क्षेत्र के लगभग 750 परिवार आज इसी अनिश्चितता में जी रहे हैं कि कल को उनकी मेहनत की कमाई से बनाए गए घर और व्यवसाय कहीं अवैध घोषित न कर दिए जाएं। यह न केवल एक मानवीय संकट है बल्कि प्रशासनिक असमंजस का भी परिणाम है।

आयुक्त की भूमिका और जनता की उम्मीदें?कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। रावत की प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता दोनों ही जगजाहिर हैं। जनता को अब यही उम्मीद है कि समिति न केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रहे बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज़, नोटिस और जमीन की वास्तविक स्थिति के आधार पर पारदर्शी निर्णय ले।

राजनीतिक प्रतिबद्धता और सामाजिक एकजुटता?पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने इस मसले को जिस गंभीरता से उठाया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा केवल राजनीति का हिस्सा नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का प्रश्न है। सभासदों से लेकर नगला बचाओ समिति तक, स्थानीय लोग एकजुट होकर अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह एकता ही प्रशासन को मजबूर करेगी कि वह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण निर्णय ले।

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला

संपादकीय दृष्टिकोण?हमारा मानना है कि –

  1. 55 वर्ष पुराने दस्तावेज़ों को आधार बनाकर सीमांकन किया जाए।
  2. सर्वे ऑफ इंडिया जैसे तकनीकी सर्वेक्षण केवल संदर्भ के लिए हों, अंतिम निर्णय सामाजिक-ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखकर किया जाए।
  3. किसी भी स्थिति में 750 परिवारों को विस्थापन या असुरक्षा की स्थिति में न डाला जाए।
  4. राज्य सरकार और मंत्रिमंडलीय समिति को इस विषय पर टाइम-बाउंड निर्णय लेना चाहिए।
  5. नगला का सवाल केवल भूमि का सवाल नहीं, यह सवाल है कि क्या सरकार और प्रशासन आम नागरिकों के जीवन, परिश्रम और भविष्य की सुरक्षा के लिए खड़े होंगे या नहीं। आज जब पूरा प्रदेश विकास और शहरीकरण की नई योजनाओं में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसे विवाद लोगों को असुरक्षा की ओर धकेलते हैं।

कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और उनकी समिति के सामने यह सुनहरा अवसर है कि वे न्याय, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ इस विवाद का समाधान कर 750 परिवारों को राहत दें। यही प्रशासनिक सफलता होगी और यही जनविश्वास की असली कसौटी।

नगला भूमि सीमांकन विवाद पर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की पहल

हल्द्वानी। नगला नगर पालिका क्षेत्र के भूमि सीमांकन और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने रविवार को कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष सचिन शुक्ला, सभासद एवं नगला बचाओ समिति के सदस्य भी मौजूद रहे।

मुलाकात में पूर्व विधायक शुक्ला ने आयुक्त को अवगत कराया कि मंत्रिमंडलीय उप समिति के निर्देशानुसार आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसे लोक निर्माण विभाग, तराई स्टेट फार्म एवं वन भूमि के चिन्हीकरण का कार्य सौंपा गया है। जरूरत पड़ने पर सर्वे ऑफ इंडिया से तकनीकी सर्वेक्षण कराने का भी प्रावधान है। उन्होंने 15 जून 1966 को लोक निर्माण विभाग द्वारा नगला निवासी को जारी नोटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विभाग ने साफ कर दिया था कि सड़क के केंद्र से दोनों ओर 50-50 फीट भूमि विभाग की है और उस पर अतिक्रमण वर्जित है। उन्होंने कहा कि 55 वर्ष पूर्व ही विभाग अपनी सीमाएं तय कर चुका है, इसलिए मौजूदा प्रक्रिया में इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

शुक्ला ने आग्रह किया कि नगला नगर पालिका क्षेत्र के लगभग 750 परिवारों के भविष्य को देखते हुए समिति जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करे। इस पर आयुक्त दीपक रावत ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि शीघ्र बैठक आयोजित कर सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

मुलाकात के दौरान सभासद सुनील रोहेल्ला, देवेंद्र यादव, धनुज यादव, नेहा मिश्रा, ज्योति प्रसाद, नीलम यादव, अजय कुमार, गोपाल दत्त जोशी मौजूद रहे। वहीं नगला बचाओ समिति से रामू बिष्ट, नारायण सिंह अरमोली, हरीश जोशी, बी.बी. मिश्रा समेत अनेक लोग शामिल हुए।

यह पहल स्थानीय लोगों में उम्मीद जगा रही है कि भूमि सीमांकन विवाद का समाधान जल्द निकलकर सैकड़ों परिवारों को राहत देगा।



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