

/रुद्रपुर।उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े करीब छह से आठ हजार शिक्षकों के लिए एक अहम फैसला सामने आया है। राज्य में वर्षों पूर्व केवल बीएड के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 5) में नियुक्त किए गए शिक्षकों को अब अनिवार्य रूप से छह माह का ब्रिज कोर्स करना होगा। यह कोर्स पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति को अमान्य माना जाएगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दिया है। इसके बाद सभी जनपदों में, रुद्रपुर स्थित ऊधम सिंह नगर जनपद सहित, ऐसे शिक्षकों से आवेदन लिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निदेशालय के अनुसार संबंधित शिक्षकों को 19 जनवरी 2026 तक हर हाल में आवेदन करना अनिवार्य है।
एनआईओएस के माध्यम से होगा ब्रिज कोर्स
यह छह माह का ब्रिज कोर्स राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के माध्यम से कराया जाएगा। कोर्स उत्तराखंड में ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) पद्धति से संचालित होगा, ताकि कार्यरत शिक्षक बिना विद्यालयी कार्य प्रभावित किए अध्ययन पूरा कर सकें।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 की अवधि के दौरान परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में केवल बीएड योग्यता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों पर यह अनिवार्यता लागू होगी। इस अवधि से पहले राज्य में बीटीसी पाठ्यक्रम मान्य था, जबकि वर्ष 2023 के बाद से सभी नई नियुक्तियों में टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन
दरअसल, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए बीएड योग्यता को पहले ही अमान्य घोषित किया जा चुका है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अंशुमान सिंह बनाम नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) व अन्य मामले में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि बीएड के आधार पर नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को शिक्षण योग्य बनाने के लिए छह माह का ब्रिज कोर्स अनिवार्य कराया जाए। अब राज्य सरकार उसी आदेश का अनुपालन कर रही है।
कोर्स नहीं किया तो नियुक्ति होगी अमान्य
निदेशालय के आदेश में यह भी साफ किया गया है कि जो शिक्षक तय समय सीमा के भीतर ब्रिज कोर्स पूरा नहीं करेंगे, उनकी नियुक्ति अमान्य मानी जाएगी। इसके लिए संबंधित शिक्षक स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेशभर में लगभग 7 से 8 हजार शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून जनपदों की भी है।
रुद्रपुर-ऊधम सिंह नगर में भी हलचल
रुद्रपुर और ऊधम सिंह नगर जनपद में भी इस आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षकों के बीच हलचल तेज हो गई है। जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2018 से 2023 के बीच केवल बीएड के आधार पर हुई थी। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है और उन्हें समय रहते आवेदन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
शुल्क को लेकर असमंजस
ब्रिज कोर्स के शुल्क को लेकर शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि इस कोर्स का शुल्क लगभग 25 हजार रुपये बताया जा रहा है, लेकिन यह शुल्क विभाग वहन करेगा या शिक्षकों को स्वयं जमा करना होगा, इस पर अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। शिक्षकों का तर्क है कि पूर्व में ऐसी व्यवस्थाओं में शुल्क विभाग की ओर से वहन किया गया था, इसलिए इस बार भी सरकार को स्पष्टता देनी चाहिए।
निदेशक का स्पष्ट संदेश
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा है—
“वर्ष 2018 से 2023 के मध्य प्राइमरी में नियुक्ति पाने वाले बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य है। निर्धारित तिथि तक सभी ऐसे शिक्षक अनिवार्य रूप से आवेदन करें।”
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग का मानना है कि यह कदम प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। वहीं, रुद्रपुर सहित पूरे प्रदेश में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ब्रिज कोर्स के शुल्क को लेकर सरकार कब स्पष्ट निर्णय लेती है।




