देहरादून से रुद्रपुर तक चला कानून का बुलडोजर, महापौर विकास शर्मा की सख्ती ने दिया अतिक्रमण-मुक्त उत्तराखंड का संदेश

Spread the love


उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में घंटाघर क्षेत्र स्थित अवैध मजार पर प्रशासन की देर रात कार्रवाई केवल एक ढांचा गिराने की घटना नहीं है, बल्कि यह उस बदले हुए शासन-प्रशासनिक तेवर का संकेत है, जिसमें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण अब किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धर्म, आस्था या पहचान की आड़ में वर्षों से पनपते रहे अवैध कब्जों पर अब कानून का बुलडोजर स्पष्ट संदेश दे रहा है—कानून सबके लिए बराबर है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


देहरादून में जिला प्रशासन और एमडीडीए की संयुक्त कार्रवाई, पूर्व नोटिस, दस्तावेजों की मांग और समयसीमा के बाद की गई—यह दर्शाती है कि यह कोई तात्कालिक या भावनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि विधिसम्मत प्रक्रिया का परिणाम था। सार्वजनिक सुविधाओं, यातायात और सुरक्षा पर असर डाल रहे अवैध निर्माण को हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी भी है और संवैधानिक दायित्व भी।

इसी कड़ी में यदि रुद्रपुर की ओर देखें, तो महापौर विकास शर्मा द्वारा हाल ही में 6 एकड़ सरकारी भूमि को भू-माफिया से मुक्त कराना स्थानीय शासन की इच्छाशक्ति का उदाहरण बनकर उभरा है।

रुद्रपुर में जिस तरह बुलडोजर कार्रवाई को आमजन का समर्थन मिला, उसने यह साबित किया कि जनता अब अव्यवस्था नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण सख्ती चाहती है। विकास शर्मा की कार्रवाई केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने शहर में यह विश्वास भी बहाल किया कि नगर निकाय केवल फाइलों तक सीमित नहीं, ज़मीन पर भी काम कर सकते हैं।
देहरादून और रुद्रपुर—दोनों घटनाएं एक ही दिशा की ओर इशारा करती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में “अतिक्रमण-मुक्त उत्तराखंड” की परिकल्पना अब नारे से आगे बढ़कर कार्रवाई में बदलती दिख रही है। योगी मॉडल की तर्ज पर यदि उत्तराखंड में कानून का समान और निष्पक्ष पालन होता है, तो यह राज्य के शहरी विकास, कानून-व्यवस्था और सामाजिक समरसता—तीनों के लिए शुभ संकेत है।
यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह लड़ाई किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैधता के खिलाफ है। यदि दस्तावेज हैं, वैधता है, तो कानून सुरक्षा देता है; और यदि कब्जा है, तो कानून कार्रवाई करता है—यही लोकतंत्र की बुनियाद है।
आज जरूरत इस बात की है कि प्रशासनिक सख्ती चयनात्मक न होकर सर्वव्यापी हो। देहरादून की कार्रवाई और रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा की पहल यदि निरंतरता पाती है, तो उत्तराखंड वास्तव में अवैध कब्जों से मुक्त, सुव्यवस्थित और न्यायपूर्ण राज्य बनने की दिशा में एक मजबूत कदम आगे बढ़ा चुका होगा।


Spread the love