15 वर्षों की निर्भीक पत्रकारिता का उत्सव: ‘मीडिया संदेश’ के सफलतम सफर को लोगों का आशीर्वाद

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उत्तराखंड की पत्रकारिता के इतिहास में कुछ संस्थान केवल समाचार पत्र या पोर्टल नहीं होते, बल्कि वे जनसरोकार, जनचेतना और जनआंदोलनों की आवाज़ बनकर समाज की धड़कन से जुड़ जाते हैं। ‘प्रज्ञाशील देश मीडिया संदेश’ ऐसा ही एक सशक्त, संघर्षशील और जनपक्षधर मीडिया संस्थान है, जिसने अपने सफलतम 15 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। यह उपलब्धि केवल एक संस्थान की आयु का पड़ाव नहीं, बल्कि सत्य, साहस और सामाजिक उत्तरदायित्व की सतत साधना का उत्सव है। 28 दिसंबर 2025 को रुद्रपुर के सिटी क्लब में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह न केवल ‘मीडिया संदेश’ की उपलब्धियों का उत्सव होगा, बल्कि उत्तराखंड की ईमानदार पत्रकारिता के गौरवशाली संघर्ष की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति भी होगी।

इस अवसर पर विशेष रूप से यह उल्लेख आवश्यक है कि ‘मीडिया संदेश’ के संपादक श्री रंजीत कुमार उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। यह मात्र एक प्रशासनिक पहचान नहीं, बल्कि उनके पत्रकारिता जीवन की ईमानदारी, निष्पक्षता और सामाजिक प्रतिबद्धता की आधिकारिक मुहर है। श्री रंजीत कुमार ने जिस दौर में पत्रकारिता को सुविधा, सत्ता और सौदेबाज़ी का माध्यम बनाया जा रहा है, उस दौर में कलम को जनहित, सत्य और निर्भयता का अस्त्र बनाए रखा—यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और उपलब्धि है।

पत्रकारिता: व्यवसाय नहीं, सामाजिक उत्तरदायित्व

आज जब मीडिया के बड़े हिस्से पर कॉरपोरेट दबाव, राजनीतिक प्रभाव और विज्ञापन-आधारित प्राथमिकताएँ हावी हैं, ऐसे समय में ‘मीडिया संदेश’ जैसे संस्थान यह साबित करते हैं कि पत्रकारिता अभी पूरी तरह मरी नहीं है। यह केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक तपस्या है—जहाँ सच के लिए जोखिम उठाने पड़ते हैं, अकेले खड़े रहना पड़ता है और कई बार सत्ता के कोप का सामना भी करना पड़ता है।

‘मीडिया संदेश’ ने पिछले 15 वर्षों में दर्जनों ऐसे मुद्दों को उठाया, जिन पर बड़े मीडिया घरानों ने या तो मौन साध लिया या केवल औपचारिकता निभाई। चाहे वह ग्रामीण समस्याएँ हों, नजूल भूमि पर बसे परिवारों की पीड़ा, अवैध कब्जों का सवाल, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, या फिर सामाजिक अन्याय के खिलाफ जनआंदोलन—‘मीडिया संदेश’ हमेशा आम आदमी की आवाज़ बनकर खड़ा रहा।

रंजीत कुमार: कलम से समाज की सेवा

श्री रंजीत कुमार का पत्रकारिता जीवन किसी आलीशान न्यूज़रूम की सुविधा से नहीं, बल्कि जमीनी संघर्ष और सीमित संसाधनों से उपजा है। उन्होंने खबर को ‘ब्रेकिंग’ बनाने से पहले उसे ‘सच’ बनाना जरूरी समझा। उनका यह सिद्धांत रहा कि—

“समाचार वह नहीं जो सबसे पहले पहुंचे, समाचार वह है जो सबसे पहले सच तक पहुंचे।”

उनकी कार्यशैली में न तो सनसनी है, न ही अफवाहों का बाज़ार। उन्होंने सदैव तथ्यों, दस्तावेज़ों और प्रत्यक्ष प्रमाणों के आधार पर पत्रकारिता की। यही कारण है कि प्रशासन, समाज और पाठक—तीनों स्तरों पर उन्हें एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में देखा जाता है।

सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकार होना उनके लंबे संघर्ष, निरंतर सक्रियता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की स्वीकृति है। यह मान्यता उन असंख्य रातों की गवाह है, जब उन्होंने फील्ड में रहकर खबरें जुटाईं; उन दिनों की साक्षी है, जब जनहित की खबरों के कारण उन्हें दबाव, उपेक्षा और कभी-कभी धमकियों का भी सामना करना पड़ा।

डिजिटल युग में ग्रामीण पत्रकारिता की मजबूत आवाज़

‘मीडिया संदेश’ ने समय के साथ स्वयं को बदला, लेकिन अपने मूल सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। प्रिंट से लेकर डिजिटल पोर्टल तक का सफर यह दिखाता है कि यह संस्थान केवल तकनीक के पीछे नहीं भागा, बल्कि तकनीक को जनसरोकार की सेवा में लगाया

आज जब सोशल मीडिया पर अधूरी, भ्रामक और प्रायोजित सूचनाओं की भरमार है, तब ‘mediasandesh.com’ जैसे पोर्टल पाठकों के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना बने हुए हैं। उत्तराखंड के दूरस्थ गाँवों से लेकर शहरी कॉलोनियों तक की समस्याएँ इस मंच के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंचीं और कई मामलों में समाधान भी संभव हुआ।

15 वर्षों का सफर: उपलब्धियाँ और प्रभाव

15 वर्षों की यात्रा केवल समय की गणना नहीं, बल्कि हजारों खबरों, सैकड़ों जमीनी रिपोर्टों और अनगिनत सामाजिक सरोकारों की लंबी श्रृंखला है। ‘मीडिया संदेश’ द्वारा उठाए गए कई मुद्दे बाद में शासन-प्रशासन की कार्रवाई का आधार बने। अनेक बार—

  • अवैध कब्जों पर कार्रवाई हुई,
  • विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति हुई,
  • अस्पतालों में सुविधाएँ बहाल हुईं,
  • गरीब परिवारों को योजनाओं का लाभ मिला,
  • और कई पीड़ितों को न्याय की राह मिली।

ये सभी उपलब्धियाँ किसी अकेले व्यक्ति की नहीं, बल्कि ‘मीडिया संदेश परिवार’ की सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम हैं—जिसमें रिपोर्टर, संवाददाता, संपादकीय टीम और जमीनी सूत्र सभी शामिल हैं।

सम्मान समारोह: पत्रकारिता के सच्चे सिपाहियों का सम्मान

28 दिसंबर 2025 को रुद्रपुर के सिटी क्लब में होने वाला वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की ईमानदार पत्रकारिता का सार्वजनिक सम्मान है। यह अवसर उन पत्रकारों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को मंच देगा, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए कार्य किया है।

ऐसे आयोजनों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यहाँ केवल पद और ओहदे नहीं, बल्कि कर्म और चरित्र का सम्मान होता है। यह समारोह युवा पत्रकारों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा कि आज भी सच्ची पत्रकारिता संभव है—यदि इरादे ईमानदार हों।

मीडिया और समाज का जीवंत संबंध

‘मीडिया संदेश’ की सबसे बड़ी शक्ति उसका पाठक वर्ग है—वह पाठक जो केवल खबर पढ़ता नहीं, बल्कि खबर से जुड़ता है, उसके पीछे छिपे सत्य को समझता है और जब जरूरत पड़ती है तो उस खबर का सामाजिक विस्तार भी करता है। यही कारण है कि ‘मीडिया संदेश’ केवल सूचना का जरिया नहीं, बल्कि आंदोलन का मंच भी बन सका है।

आज जब लोग मीडिया से विश्वास खोते जा रहे हैं, तब ‘मीडिया संदेश’ जैसे संस्थान उस टूटते विश्वास को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। यह संस्था यह सिद्ध करती है कि यदि पत्रकारिता सही दिशा में हो, तो वह लोकतंत्र की असली चौकीदार बन सकती है।

उत्तराखंड सरकार और समाज से अपेक्षाएँ

उत्तराखंड सरकार से यह अपेक्षा भी स्वाभाविक है कि ऐसे ईमानदार मीडिया संस्थानों और सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकारों को न केवल औपचारिक, बल्कि वास्तविक सम्मान और संरक्षण भी मिले। पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान लोकतंत्र की सेहत के लिए अनिवार्य हैं। ‘मीडिया संदेश’ का 15वां वर्ष इस बात का भी संकेत है कि सरकार और समाज को निष्पक्ष पत्रकारिता के साथ खड़े रहना चाहिए।

भविष्य की ओर: नई चुनौतियाँ, नई संभावनाएँ

डिजिटल युग में पत्रकारिता की चुनौतियाँ और भी जटिल हो गई हैं—फर्जी खबरें, ट्रोल संस्कृति, दबाव की राजनीति और आर्थिक अस्थिरता। इसके बावजूद ‘मीडिया संदेश’ ने यह साबित किया है कि सिद्धांतों पर चलकर भी मीडिया जिंदा रह सकता है। आने वाले वर्षों में यह उम्मीद की जाती है कि ‘मीडिया संदेश’ तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त होगा, लेकिन उसकी आत्मा वही रहेगी—जनहित, निष्पक्षता और निर्भीकता

श्री रंजीत कुमार के नेतृत्व में यह संस्था आने वाले समय में भी उत्तराखंड की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों की आवाज़ बनी रहे—यही कामना है।एक संस्थान को नहीं, एक विचार को 15 वर्ष

15 वर्ष पूरे होना केवल ‘मीडिया संदेश’ नामक संस्था का उत्सव नहीं, बल्कि उस विचार का उत्सव है कि पत्रकारिता आज भी समाज के पक्ष में खड़ी हो सकती है। यह उत्सव उस भरोसे का है, जो पाठकों ने इस संस्थान पर किया; उस संघर्ष का है, जो टीम ने झेला; और उस सत्य का है, जिसे हर हाल में सामने लाया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर हम ‘प्रज्ञाशील देश मीडिया संदेश’, उसके संपादक श्री रंजीत कुमार (मान्यता प्राप्त पत्रकार) और समस्त मीडिया संदेश परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह संस्था यूँ ही सत्य की मशाल जलाती रहे, अन्याय के विरुद्ध खड़ी रहे और उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश में निर्भीक पत्रकारिता की मिसाल बनती रहे।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!15 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा को ढेर सारी शुभकामनाएं—और भविष्य के उज्ज्वल कल के लिए मंगलकामनाएँ।


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