देहरादून। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मोहब्बेवाला स्थित विंडलास बायोटेक प्रालि. की औषधि निर्माण इकाई में कोडीन युक्त कफ सिरप के उत्पादन पर रोक लगा दी है।

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यह कार्रवाई औचक निरीक्षण के दौरान फर्म में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के बाद की गई है। विभाग ने फर्म को प्रदत्त निर्माण अनुमति को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

एफडीए आयुक्त सचिन कुर्वे के दिशा-निर्देश और अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी के मार्गदर्शन में औषधि नियंत्रण शाखा की टीम ने इकाई का निरीक्षण किया।

निरीक्षण में यह पाया गया कि फर्म द्वारा निर्मित कुछ औषधियां गुणवत्ता मानकों और लाइसेंस शर्तों के अनुरूप नहीं हैं, जो सीधे जन स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।

अपर आयुक्त जग्गी ने स्पष्ट किया कि कोडीन युक्त कफ सिरप और अन्य मनः प्रभावी औषधियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्य सरकार की नीति जीरो टालरेंस की है। जहां भी नियम उल्लंघन, लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन या अवैध गतिविधि पाई जाएगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके तहत जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं और पूरे प्रदेश में नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण तेज कर दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि औषधि निर्माण और आपूर्ति सीधे आम नागरिकों के स्वास्थ्य से जुडा मसला है, इसलिए किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं है।

विभाग ने सभी जिलों के औषधि अधिकारियों को कोडीन सिरप और अन्य नशीली औषधियों के दुरुपयोग पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

इधर, न्यायिक मोर्चे पर भी कड़ा संदेश दिया गया है। नैनीताल में वर्ष 2019 और 2020 में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक द्वारा एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में चार दोषियों को 12 वर्ष की कठोर कारावास और 1.20 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। यह निर्णय अवैध नशीली दवाओं से जुड़े तत्वों के लिए चेतावनी है।


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