

देहरादून।उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के हितों की पुरजोर वकालत करते हुए केंद्रीय मुख्य संरक्षक चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति एवं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर राज्य निर्माण के अग्रणी आंदोलनकारियों को सम्मान देने की मांग की है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
धीरेंद्र प्रताप ने अपने पत्र में कहा कि वर्ष 1994 में खटीमा से उपजे उत्तराखंड आंदोलन की नींव दरअसल उससे बहुत पहले रखी जा चुकी थी। राज्य निर्माण के लिए 1960 के दशक से लेकर 1994 तक तमाम क्षेत्रों में जागरूक नागरिकों, समाजसेवियों, शिक्षकों, पत्रकारों और किसानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इन अग्रिम पंक्ति के आंदोलनकारियों ने धरना-प्रदर्शन, जुलूस, गिरफ्तारी, न्यायालय में पैरवी, और दिल्ली में शिष्टमंडल वार्ताओं के माध्यम से राज्य निर्माण की दिशा में निर्णायक योगदान दिया।
प्रताप ने कहा कि यह विडंबना है कि ऐसे सैकड़ों वरिष्ठ आंदोलनकारी, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी राज्य निर्माण के लिए समर्पित कर दी, आज “भीड़ का हिस्सा” मानकर उपेक्षित कर दिए गए हैं। उन्होंने मांग की कि शासन स्तर पर तहसील और जिला स्तर से अग्रणी आंदोलनकारियों की सूची मंगाई जाए और उनकी भूमिका की जांच के लिए विशेष समिति गठित की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि इन “उच्च कोटि के राज्य आंदोलनकारियों” को अलग श्रेणी में रखते हुए सरकार द्वारा विशेष सम्मान दिया जाए। प्रताप ने कहा कि वर्तमान में 1994 के आंदोलन से जुड़े कई आंदोलनकारियों को चिह्नित कर लाभ दिए जा रहे हैं, परंतु 1994 से पहले की पीढ़ी — जिसने इस आंदोलन की बुनियाद रखी — को अब तक मान्यता नहीं मिली है।
धीरेंद्र प्रताप ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर ऐसे वरिष्ठ आंदोलनकारियों के योगदान को उचित सम्मान और पहचान दे, जिससे राज्य निर्माण के मूल भाव और आंदोलन की आत्मा का सम्मान बना रहे।




