

इस पर अब उन्होंने खुद चुप्पी तोड़ी है और उनको इस शब्द का इस्तेमाल करने का पछतावा है, लेकिन वे भारतीय टीम से माफी मांगने के लिए तैयार नहीं हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
शनिवार को विशाखापट्टनम में खेले गए तीसरे वनडे मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरा इरादा कभी भी किसी के प्रति बुराई करने या किसी भी बात पर घमंडी होने का नहीं था। सोचने पर मुझे लगा कि मैं इससे बेहतर शब्द चुन सकता था, क्योंकि इससे लोगों को अपने हिसाब से इसका मतलब निकालने का मौका मिल गया। मेरा मतलब सिर्फ यह था कि भारत (मैदान पर) ज्यादा समय बिताए और उनके लिए इसे बहुत मुश्किल बना दे। अब मुझे यहां यह ध्यान रखना होगा कि मैं कौन सा शब्द इस्तेमाल करूं, क्योंकि उसके साथ भी कॉन्टेक्स्ट जोड़ा जा सकता है!”
25 नवंबर को, गुवाहाटी टेस्ट की चौथी शाम को कोनराड से पूछा गया कि उनकी टीम ने 549 रन की बढ़त लेने से पहले पांच घंटे और चार मिनट तक बैटिंग क्यों की? यह भारत में किसी भी टेस्ट में सफलतापूर्वक चेज किए गए स्कोर से 161 रन ज्यादा था। कोनराड ने तब कहा, “हम चाहते थे कि भारतीय खिलाड़ी मैदान पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। हम चाहते थे कि वे सच में परेशान हों, जैसा कि एक कहावत है। उन्हें खेल से पूरी तरह बाहर कर दें, और फिर कहें कि आओ और आज शाम आखिरी दिन और एक घंटे तक टिके रहो।”
एक शब्द पर बवाल
उन 48 शब्दों के बयान में से 47 शब्द बिल्कुल ठीक हैं। एक शब्द था ग्रोवेल, वह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। यह गुलामी, उपनिवेशवाद और नस्लवाद से जुड़ा है और जब टोनी ग्रेग ने मई 1976 में इसका इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि वह अपनी इंग्लैंड टीम से वेस्टइंडीज के साथ क्या करवाना चाहते हैं, तो इससे काफी हंगामा हुआ, जिसके बाद वेस्टइंडीज की टीम इतनी गुस्सा हो गई कि उसने सीरीज 3-0 से जीत ली। कोनराड ने शनिवार को आगे कहा, “यह सच में दुख की बात है। हो सकता है कि इसने वनडे सीरीज को और मज़ेदार बना दिया हो और खासकर जब इंडिया ने अब वह सीरीज जीत ली है, तो T20 सीरीज और भी ज्यादा रोमांचक हो जाएगी।”




