संपादकीय | रुद्रपुर में ‘बंग भवन’—संस्कृति, समर्पण और संकल्प का संगम! विधायक शिव अरोड़ा के प्रयासों से साकार होगा ‘बंग भवन’ का सपना, रुद्रपुर में सांस्कृतिक धरोहर की नई पहचान

Spread the love


रुद्रपुर उत्तराखंड की तराई नगरी रुद्रपुर एक बार फिर अपनी बहुसांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है। बंगाली समाज की वर्षों पुरानी मांग—‘बंग भवन’ के निर्माण—को अब वास्तविकता की राह मिलती दिख रही है। यह केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, त्याग और राष्ट्रभक्ति के उस अध्याय को सहेजने का प्रयास है, जिसने तराई को बसाने से लेकर देश की स्वतंत्रता तक में अहम भूमिका निभाई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

रुद्रपुर में बंग भवन निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए विधायक शिव अरोरा ने बंगाली समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ जिलाधिकारी नितिन भदोरिया से मुलाकात कर भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने हेतु ज्ञापन सौंपा। किच्छा रोड स्थित पुराने ट्रेजरी कार्यालय की भूमि को भवन निर्माण के लिए चयनित किया गया है। विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस मांग को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और अब इसे धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी लाई जा रही है। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इस दौरान दर्जामंत्री उत्तम दत्ता, बंगाली महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार शाह, पूर्व मंडी अध्यक्ष केके दास, समीर राय, शंकर चक्रवर्ती, गणेश सरकार, विशाल शील और पलव शील सहित कई लोग मौजूद रहे। विधायक ने कहा कि यह भवन बंगाली समाज की संस्कृति और इतिहास का प्रतीक बनेगा।

पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने रुद्रपुर में प्रस्तावित ‘बंग भवन’ को लेकर संतुलित और सकारात्मक बयान जारी करते हुए कहा कि बंगाली समाज ने तराई क्षेत्र के विकास, बसावट और सांस्कृतिक समृद्धि में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि अपने विधायक कार्यकाल के दौरान, विशेषकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के समय में, उन्होंने भी इस दिशा में प्रयास किए थे ताकि बंगाली समाज को एक सांस्कृतिक केंद्र मिल सके।
महाजन ने वर्तमान में विधायक शिव अरोड़ा द्वारा इस कार्य को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनहित और समाजहित के कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘बंग भवन’ न केवल बंगाली समाज की पहचान को सशक्त करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनकी समृद्ध परंपराओं, कला और इतिहास से भी जोड़ेगा। उन्होंने समस्त बंगाली समाज को इस पहल के लिए शुभकामनाएं देते हुए इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया।पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने बयान जारी करते हुए कहा कि गदरपुर विधानसभा में भी बंगाली समाज के लिए ‘बंग भवन’ का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कई बार सरकार को पत्र लिखकर इस मांग को उठाया, लेकिन आज भी यह मुद्दा अधूरा है। महाजन ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है और बंगाली समाज की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह समाज तराई की बसावट, श्रम और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का आधार रहा है, फिर भी इसके संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।


इस पूरे प्रयास के केंद्र में यदि किसी जनप्रतिनिधि की सक्रियता और संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो वह हैं रुद्रपुर के विधायक शिव अरोरा। उन्होंने जिस गंभीरता और निरंतरता के साथ इस विषय को उठाया, वह आज परिणाम के रूप में सामने आने लगा है। प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उनका स्वयं प्रतिनिधिमंडल के साथ जिलाधिकारी से मिलना यह दर्शाता है कि वे केवल घोषणा तक सीमित रहने वाले नेता नहीं, बल्कि धरातल पर काम करने में विश्वास रखने वाले जनप्रतिनिधि हैं।
संस्कृति का सम्मान—राजनीति से परे एक पहल
रुद्रपुर, जिसे आज औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है, उसकी नींव में विभिन्न समुदायों का योगदान रहा है। बंगाली समाज ने न केवल इस क्षेत्र को बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से इस क्षेत्र को जीवंत भी बनाया। दुर्गा पूजा, काली पूजा, साहित्यिक परंपराएं, संगीत और कला—ये सभी इस समाज की पहचान हैं।
ऐसे में ‘बंग भवन’ का निर्माण केवल एक सामुदायिक केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की तरह कार्य करेगा। यहां पर बंगाली कला, साहित्य, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को संरक्षित किया जाएगा। यह पहल उस विचार को भी मजबूती देती है कि विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें संस्कृति और पहचान का संरक्षण भी शामिल होना चाहिए।
शिव अरोरा की पहल—संकल्प से सिद्धि तक
विधायक शिव अरोरा ने जिस तरह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा और उसे सरकारी घोषणा का हिस्सा बनवाया, वह उनकी राजनीतिक समझ और जनभावनाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। 14 अगस्त 2023 को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ जैसे गंभीर अवसर पर इस मांग को उठाना भी एक प्रतीकात्मक और भावनात्मक कदम था, जिसने इस विषय को और अधिक प्रासंगिक बना दिया।
इसके बाद उन्होंने इसे केवल एक घोषणा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि लगातार प्रशासनिक स्तर पर फॉलोअप करते रहे। किच्छा बायपास रोड स्थित पुराने ट्रेजरी कार्यालय की भूमि का चयन और उस पर सभी पक्षों की सहमति बनवाना, यह दिखाता है कि उन्होंने इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए हर संभव प्रयास किया है।
आज जब वे स्वयं बंगाली समाज के प्रतिनिधियों के साथ जिलाधिकारी से मिलकर लैंड ट्रांसफर प्रक्रिया को तेज करने की मांग कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि वे इस परियोजना को केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व के रूप में देख रहे हैं।
सरकार की भूमिका—संकल्प को समर्थन
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, इस पहल के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं। किसी भी विकास कार्य के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक होती है, और इस मामले में सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार द्वारा इसे घोषणा में शामिल


Spread the love