

रुद्रपुर में सेवा क्रांति वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर केवल 26 यूनिट रक्त संग्रह का समाचार भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के संवेदनशील और जिम्मेदार चेहरे को उजागर करने वाला एक प्रेरक उदाहरण है। थैलसीमिया से पीड़ित मासूम बच्चों और जरूरतमंद मरीजों के लिए आयोजित यह शिविर हमें याद दिलाता है कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के बावजूद आज भी रक्त जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए हजारों परिवार समाज की संवेदनशीलता पर निर्भर हैं।
थैलसीमिया कोई सामान्य बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी आजीवन चुनौती है जिसमें पीड़ित बच्चों को हर 10–15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। यह केवल चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवारों के लिए भावनात्मक, आर्थिक और सामाजिक संघर्ष भी है। ऐसे में रक्तदान शिविरों का महत्व केवल स्वास्थ्य सेवा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय करुणा का प्रत्यक्ष उदाहरण बन जाता है।
सेवा क्रांति वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा जय माँ भगवती इंटरप्राइजेज कार्यालय में आयोजित इस शिविर में रुद्रपुर चेरिटेबल ब्लड बैंक का सहयोग यह दर्शाता है कि जब सामाजिक संगठन और संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो परिणाम सार्थक और प्रभावी होते हैं। 26 रक्तदाताओं का स्वेच्छा से आगे आना इस बात का संकेत है कि समाज में आज भी मानवता जीवित है, बस उसे सही मंच और सही आह्वान की आवश्यकता होती है।
ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष रामवीर यादव, उपाध्यक्ष अलका अरोड़ा और ललित भैया द्वारा रक्तदाताओं के प्रति व्यक्त आभार केवल औपचारिक धन्यवाद नहीं, बल्कि उस विश्वास की अभिव्यक्ति है जो ऐसे सामाजिक प्रयासों की रीढ़ होता है। उनका यह कथन कि “एक यूनिट रक्त किसी बच्चे का जीवन बचा सकता है”, किसी नारे से अधिक एक कड़वी सच्चाई है। यह वाक्य हमें झकझोरता है कि हमारे थोड़े से समय और इच्छाशक्ति से किसी मासूम की पूरी जिंदगी सुरक्षित हो सकती है।
दुखद तथ्य यह भी है कि रक्त की कमी आज भी देश की एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। आपातकालीन स्थितियों, सर्जरी, दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के समय रक्त की उपलब्धता कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है। इसके बावजूद समाज में रक्तदान को लेकर आज भी भ्रांतियां, डर और उदासीनता देखने को मिलती है। ऐसे में सेवा क्रांति वेलफेयर ट्रस्ट जैसे संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो न केवल रक्त संग्रह करते हैं, बल्कि जागरूकता का कार्य भी करते हैं।
इस संपादकीय के माध्यम से यह कहना आवश्यक है कि रक्तदान किसी एक संगठन या कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। गुरुद्वारे, मंदिर, मस्जिद, चर्च, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयां और व्यापारिक संगठन—सभी यदि वर्ष में कम से कम एक रक्तदान शिविर का आयोजन करें, तो रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। यह केवल दान नहीं, बल्कि सामाजिक निवेश है, जिसका प्रतिफल मानव जीवन के रूप में मिलता है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहन और सहयोग देना चाहिए। स्थायी रक्तदान केंद्रों की संख्या बढ़ाने, मोबाइल ब्लड यूनिट्स को सक्रिय करने और रक्तदाताओं को प्रोत्साहन देने की नीतियां समय की मांग हैं। साथ ही, युवाओं में रक्तदान को सामाजिक गर्व से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि यह एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कार बन सके।
सेवा क्रांति वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित यह रक्तदान शिविर हमें यह संदेश देता है कि समाज में बदलाव बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे मानवीय कार्यों से आता है। 26 यूनिट रक्त भले ही आंकड़ों में छोटा लगे, लेकिन जिन बच्चों और मरीजों की सांसें इससे चलेंगी, उनके लिए यह पूरी दुनिया के बराबर है।
अंततः, रक्तदान केवल सुई चुभने का साहस नहीं, बल्कि दिल से निकलने वाली संवेदना का प्रमाण है। यदि हम सच में एक संवेदनशील, जिम्मेदार और मानवीय समाज का निर्माण चाहते हैं, तो रक्तदान को अपनी सामाजिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। सेवा क्रांति वेलफेयर ट्रस्ट का यह प्रयास इसी दिशा में एक सराहनीय कदम है—एक ऐसा कदम, जो दूसरों को भी मानवता के इस पथ पर चलने की प्रेरणा देता है।





