संपादकीय:धामी सरकार का ‘ऑपरेशन कालनेमी’: धार्मिक आस्था की आड़ में पनपे ढोंग का सफाया126 नकली बाबा  2 बांग्लादेशी  पकड़े

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उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। गंगा-यमुना की पवित्र धारा से लेकर चारधाम और कांवड़ यात्रा तक, यहां हर कदम पर श्रद्धा और विश्वास की धरोहर बसी हुई है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इन्हीं धार्मिक भावनाओं की आड़ में लंबे समय से ठगी, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना और अंधविश्वास का कारोबार फल-फूल रहा था। हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थ को ढोंगी बाबाओं और फर्जी तांत्रिकों ने ठगी का अड्डा बना लिया था। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन कालनेमी’ न केवल साहसिक पहल है बल्कि उत्तराखंड की आत्मा को बचाने का संकल्प भी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

कालनेमी क्यों??रामायण का कालनेमी संत का वेश धरकर वानरों को धोखा देता है। ठीक उसी तरह आज के ये नकली बाबा भगवा पहनकर, लंबी जटाएं रखकर और मंत्रोच्चार की आड़ में भोली-भाली जनता को ठगते रहे। ऐसे में सरकार द्वारा इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन कालनेमी’ रखना प्रतीकात्मक ही नहीं बल्कि चेतावनी भी है—जो धर्म का मुखौटा पहनकर अपराध करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

कार्रवाई का प्रभाव?हरिद्वार पुलिस ने एक ही दिन में 126 ढोंगी बाबाओं को सलाखों के पीछे भेज दिया, जिनमें दो बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। ये विदेशी फर्जी आधार कार्ड बनाकर भगवा वस्त्र पहनकर सक्रिय थे। यह तथ्य केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा है। पिछले दो महीनों में 4,500 से अधिक संदिग्धों का सत्यापन और 441 गिरफ्तारियां अपने आप में अभूतपूर्व आंकड़ा है।

धामी सरकार का विजन?मुख्यमंत्री धामी बार-बार कहते रहे हैं कि उत्तराखंड का आध्यात्मिक स्वरूप किसी भी हालत में दूषित नहीं होने दिया जाएगा। यह अभियान इसी दृष्टि का हिस्सा है।

  • पहला, सरकार धार्मिक पर्यटन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है।
  • दूसरा, उत्तराखंड को अंधविश्वास और ठगी से मुक्त कर वैज्ञानिक सोच और सच्चे अध्यात्म की भूमि के रूप में पहचान दिलाना चाहती है।
  • तीसरा, कांवड़ यात्रा और चारधाम यात्रा जैसे आयोजनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए जरूरी है कि नकली बाबाओं और अपराधियों पर सख्ती हो।

जनता के लिए संदेश?इस कार्रवाई से जनता को भी सबक लेना होगा। आस्था आंख मूंदकर विश्वास करने का नाम नहीं है। जब तक लोग तंत्र-मंत्र और झूठे वादों के झांसे में आते रहेंगे, तब तक ऐसे कालनेमी पनपते रहेंगे। समाज को भी पुलिस और प्रशासन का सहयोग करना होगा।

‘ऑपरेशन कालनेमी’ केवल पुलिस की कार्रवाई नहीं है, यह देवभूमि की गरिमा बचाने की जंग है। धामी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में धर्म के नाम पर ठगी और अपराध की कोई जगह नहीं होगी। यदि यह अभियान लगातार जारी रहा तो न केवल हरिद्वार, बल्कि पूरा उत्तराखंड धार्मिक पर्यटन और सच्चे अध्यात्म का सुरक्षित केंद्र बन सकेगा।


यह खबर सिर्फ गिरफ्तारी की गिनती नहीं है, बल्कि एक नए उत्तराखंड विजन की शुरुआत है—जहां आस्था का सम्मान होगा, लेकिन ढोंग और अपराध के लिए जगह नहीं।


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