संपादकीय: पंडित दामोदर फुलारा जी—स्वस्थ जीवन का चलता-फिरता आदर्श

Spread the love

आज के समय में जब कम उम्र में ही लोग बीमारियों, तनाव और अवसाद के शिकार हो रहे हैं, ऐसे दौर में आदरणीय पंडित दामोदर फुलारा जी जैसा व्यक्तित्व समाज के लिए किसी प्रकाश स्तंभ से कम नहीं है। संयमित रहन-सहन, नियमित योगासन, संतुलित भोजन और अनुशासित दिनचर्या के बल पर उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया है कि लंबा ही नहीं, स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन भी जिया जा सकता है। रेलवे मंत्रालय में सेवा दे चुके पंडित जी आज 96 वर्ष की आयु में भी जिस सक्रियता और जीवंतता के साथ जीवन जी रहे हैं, वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

प्रातः 4 बजे से आरंभ होने वाली उनकी दिनचर्या आज भी निरंतर गतिमान है। वे केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत सशक्त हैं। सनातन धर्म के प्रकांड विद्वान पंडित जी के संस्कारों का असर पूरे परिवार में स्पष्ट झलकता है। बरेली में निवास करता उनका पूरा परिवार आज भी संस्कारवान पीढ़ी के रूप में समाज के सामने एक उदाहरण है।

विशेष बात यह है कि उन्होंने जीवन भर आधुनिक दवाओं पर निर्भरता नहीं रखी। आवश्यकता पड़ने पर घरेलू आयुर्वेदिक उपचार ही उनका सहारा रहा। हाल ही में दीपक भट्ट के विवाह कार्यक्रम तथा अपनी पौत्री के विवाह में 96 वर्ष की आयु में मंच पर उनकी ऊर्जा और उत्साह देखकर सभी दंग रह गए। विदाई के समय उनकी भावुकता ने यह भी सिद्ध किया कि संवेदनशीलता आज भी उतनी ही जीवंत है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया और बड़ी-बड़ी कंपनियाँ केवल भ्रामक और दिखावटी विज्ञापनों के बजाय पंडित दामोदर फुलारा जी जैसे आदर्श व्यक्तित्वों को सामने लाएं। ताकि वर्तमान पीढ़ी को वास्तविक प्रेरणा मिले—कि स्वस्थ जीवन दवाओं से नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, संस्कार और संतुलन से बनता है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनकी कृपा ऐसे आदर्श जनों पर बनी रहे और समाज उनका अनुसरण करे।


Spread the love