संपादकीय व्यंग्य : फ्लैक्सी से गायब हुआ चेहरा – क्या भाजपा में ‘फोटोशॉप पॉलिटिक्स’ शुरू हो गई है? लेखक: अवतार सिंह बिष्ट (रूद्रपुर से विशेष संपादकीय, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स)

Spread the love

रुद्रपुर की राजनीति में इन दिनों तस्वीरें कम और तस्वीरों की ग़ायबगी ज़्यादा चर्चा में है। जी हां, बात हो रही है केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर रुद्रपुर नगर की मुख्य सड़कों पर लगाई गई “स्वागत फ्लैक्सी” की—जिनमें शहर के निर्वाचित विधायक शिव अरोड़ा की तस्वीर या तो ग़ायब है, या इतनी छोटी कि जैसे फ़ोटोकॉपी में ‘जूम आउट’ कर दी गई हो।

अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई ये कोई भूल थी, या फिर रुद्रपुर की राजनीति में अब “फोटोशॉप पॉलिटिक्स” का दौर शुरू हो गया है?

नगर निगम की “नैतिकता” और राजनीतिक सौजन्य” पर सवाल?महापौर विकास शर्मा की अगुवाई में जिस प्रकार शहर को सजाया गया, वह प्रशंसनीय हो सकता है, लेकिन उसमें एक लोकतांत्रिक प्रतिनिधि की तस्वीर न होना किसी चूक से अधिक “राजनीतिक संकेत” जैसा लगता है। एक ओर नगर निगम ‘हर घर तिरंगा’ की अपील करता है, दूसरी ओर अपने ही विधायक का “चेहरा गायब” कर देना, भाजपा की आंतरिक राजनीति की ‘गहरी खिचड़ी’ की महक दे रहा है।

यह पहली बार नहीं…?ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब विधायक शिव अरोड़ा को ‘पार्श्व संगीत’ की तरह मंच से पीछे धकेला गया हो। इससे पहले शिव प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में भी उनकी मौजूदगी को ‘मौन स्वीकृति’ मिली थी। और अब गृहमंत्री जैसे बड़े नेता के स्वागत में ‘मुख्य किरदार’ को फ्लैक्सी से ही गायब कर देना क्या सिर्फ़ संयोग है?

अगर शिव अरोड़ा जी की राजनीतिक छवि को हम देखे तो वे आज तक टकराव से दूर, शांत और संतुलित स्वरूप के राजनेता माने जाते रहे हैं। ना हल्ला ना कैमरे के लिए लपकने की आदत। पर राजनीति में ‘शांत नेता’ अक्सर ‘शिकार’ हो जाते हैं।

तो सवाल उठता है: क्यों नहीं लगाई गई तस्वीर?क्या नगर निगम भाजपा में अब समानांतर शक्ति केंद्र बन चुका है?

  1. क्या महापौर खुद को रुद्रपुर का अगला विधायक मान चुके हैं?
  2. या फिर पार्टी में ‘चेहरे छांटने’ की आंतरिक नीति शुरू हो गई है?

सवाल गंभीर हैं। जवाब और भी गंभीर हो सकते हैं।


फ्लैक्सी क्रांति” का युग:भाजपा में अब विचारधारा से ज़्यादा ‘विज़ुअल धारणा’ मायने रखती है। फ्लैक्सी में कौन दिखा, कौन नहीं—अब यही टिकट का भविष्य तय करेगा।भाजपा का नया मंत्र:

जो दीखता है, वही टिकता है!”
और जो नहीं दीखता… उसे “टिकने” की कोई गारंटी नहीं।


व्यंग्यात्मक विश्लेषण: “माय डियर अरोड़ा जी, फ्लैक्सी में आना अब मेरिट से नहीं, ‘मैरिटॉरियल स्ट्रैटजी’ से तय होता है!”

“प्रिय विधायक जी,राजनीति अब चुपचाप काम करने का नहीं, कैमरे के फ्लैश में मुस्कराने का नाम है। आप हर उद्घाटन पर फीता काटते हैं, लेकिन फ्लैक्सी में ‘कट’ हो जाते हैं। ये समय ‘विकास’ का है… वो वाला नहीं, वो विकास जो महापौर हैं।अब अगली बार जब आप सड़क बनवाएं, गड्ढा भरवाएं, तो फोटोशूट भी करवा लें। नहीं तो कहीं ऐसा ना हो कि अगली बार फ्लैक्सी में विकास अकेले ही ‘मुस्करा’ रहे हों… और अरोड़ा जी केवल फोटो खींचने वाले का नाम बनकर रह जाएं!


भाजपा को चाहिए कि वह इन ‘फ्लैक्सी गेम्स’ को लेकर एक आंतरिक नैतिक संहिता बनाए। क्या पार्टी में जनता द्वारा चुने गए विधायक की इतनी उपेक्षा सिर्फ एक नगर निगम के मुखिया की ‘फोटो लूट’ की भूख के कारण होनी चाहिए?चुनाव आ रहे हैं…अगर तस्वीरों से विधायक को मिटाने की कोशिश जारी रही, तो जनता भी अपना वोट ‘एडिट’ कर सकती है।शायद तब, किसी और की ‘फ्लैक्सी’ से कोई और ‘गायब’ हो!

क्या महापौर विकास शर्मा खुद को अगला विधायक मान चुके हैं?

रुद्रपुर में हाल की घटनाएं खासतौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आगमन पर लगाई गई फ्लैक्सियों से विधायक शिव अरोड़ा की तस्वीर गायब होना, राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। महापौर विकास शर्मा की इन फ्लैक्सियों में प्रमुखता और विधायक की उपेक्षा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे खुद को अगला विधायक मान चुके हैं?

नगर निगम के कार्यों में उनकी बढ़ती सक्रियता, हर सरकारी कार्यक्रम में केंद्र मंच पर उनकी मौजूदगी, और हालिया फ्लैक्सी विवाद इस धारणा को और मजबूत कर रहे हैं कि वे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुके हैं। भाजपा की राजनीति में दृश्य उपस्थिति अब कार्य से बड़ी बन गई है, और विकास शर्मा इसे बखूबी भुना रहे हैं। ऐसे में अगर विधायक अरोड़ा को बार-बार दरकिनार किया जा रहा है, तो यह सिर्फ ‘चूक’ नहीं, बल्कि सुनियोजित रणनीति का हिस्सा लगती है।जनता इस बदलाव को देख रही है — और वक्त आने पर जवाब भी दे सकती है।



Spread the love