उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना केवल भूगोल या प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसे जनहितकारी शासन का सपना था, जिसमें जनता भयमुक्त जीवन जी सके, कानून-व्यवस्था मज़बूत हो और अपराधियों को यह एहसास रहे कि उनके लिए देवभूमि की पवित्र धरती पर कोई जगह नहीं है। इस परिकल्पना को व्यवहार में बदलने का कार्य आज ऊधम सिंह नगर पुलिस के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा बखूबी कर रहे हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

उनके कुशल निर्देशन और त्वरित कार्रवाई ने पुलिसिंग की परिभाषा को नए सिरे से गढ़ा है। आज चोरी हो, नशा तस्करी हो, साइबर अपराध हो या नाबालिग के साथ घिनौनी वारदात—हर अपराधी यह जानता है कि “मिश्रा जी और उनकी टीम की नज़र से कोई नहीं बच सकता।”
नाबालिग के साथ दुष्कर्म और हत्या—12 घंटे में खुलासा
हाल ही में जसपुर कोतवाली क्षेत्र में घटी नृशंस वारदात ने पूरे जिले को झकझोर दिया। लेकिन यहाँ पुलिस की पारखी नज़र और तेज़ कार्रवाई सामने आई।
बच्चे के रोने की आवाज़ को सुराग बनाया गया।
10 पुलिस टीमों का गठन कर महज़ 12 घंटे में आरोपी को पकड़ लिया गया।आरोपी की निशानदेही पर खून से सना ब्लेड और कपड़े बरामद हुए।
यह कार्रवाई न केवल पुलिस की सजगता का प्रमाण है, बल्कि इस बात का भी सबूत है कि मणिकांत मिश्रा की टीम किसी भी गंभीर मामले को प्राथमिकता से लेती है और अपराधी को चैन की सांस नहीं लेने देती।
चोरी और नशा तस्करी पर कड़ा प्रहार!
सितारगंज पुलिस ने एसएसपी के निर्देश पर ठोस सुरागरसी करते हुए 08 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
05 मोटरसाइकिल,
30 किलो मंदिर की घंटियां,
और स्मैक बरामद की गई।यह दिखाता है कि एसएसपी मिश्रा केवल बड़े मामलों पर ही नहीं, बल्कि समाज की जड़ों को खोखला करने वाले हर अपराध पर बराबर ध्यान देते हैं।

पाँच लाख की अफ़ीम के साथ तस्कर गिरफ्तार
किच्छा पुलिस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम ने 01 किलो 13 ग्राम अफ़ीम बरामद कर नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ दिया। इसकी कीमत लगभग 5 लाख आँकी गई।
नशा तस्करों पर इस तरह की ताबड़तोड़ कार्रवाई यह संदेश देती है कि “ड्रग्स फ्री देवभूमि” केवल नारा नहीं, बल्कि मिश्रा जी का वास्तविक अभियान है।
साइबर अपराधियों की धरपकड़
डिजिटल युग में अपराध का नया रूप—साइबर ठगी—आज हर परिवार के लिए चिंता का विषय है। लेकिन खटीमा पुलिस ने 02 शातिर ठगों को लखनऊ से गिरफ्तार कर 18 लाख की साइबर ठगी का खुलासा किया।
आरोपियों ने 1.86 करोड़ की ऑनलाइन ठगी की बात कबूल की।
25 और मामलों में उनकी संलिप्तता सामने आई।
इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि चाहे अपराध साइबर दुनिया में हो या सड़क पर, एसएसपी मिश्रा की रणनीति से अपराधियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।
खेलों में पुलिस की विजयगाथा!
सिर्फ अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पुलिस बल का मनोबल और ऊर्जा बनाए रखना भी एक सफल नेतृत्व का हिस्सा है।
देहरादून में आयोजित पुलिस खेल प्रतियोगिता में ऊधम सिंह नगर पुलिस ने 3 स्वर्ण सहित 7 पदक जीते। पदक विजेताओं को स्वयं एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने सम्मानित किया। यह सम्मान पुलिसकर्मियों को यह संदेश देता है कि उनका नेता केवल निर्देश देने वाला नहीं, बल्कि प्रेरणा देने वाला भी है।

ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा?
कुण्डा क्षेत्र में एक सड़क हादसे की आड़ में हुआ हत्याकांड सामने आया। लेकिन मिश्रा जी के निर्देशन में पुलिस ने इसे सुलझाया और दो अभियुक्त अवैध तमंचे सहित गिरफ्तार किए।
यह उदाहरण बताता है कि ऊधम सिंह नगर पुलिस केवल सतही जाँच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सच तक पहुँचने के लिए हर परत को खोलती है।
अवैध शस्त्र और वायरल वीडियो
आज की पीढ़ी सोशल मीडिया की चकाचौंध में अक्सर अपराध की ओर आकर्षित होती है। लेकिन जब दो युवकों ने अवैध शस्त्र के साथ वीडियो वायरल किया, तो एसएसपी मिश्रा ने तुरंत संज्ञान लिया और उन्हें गिरफ्तार कराया।
यह संदेश साफ है—सोशल मीडिया पर अपराध का प्रदर्शन करना भी किसी को नहीं छोड़ा जाएगा।
समाज में विश्वास, अपराधियों में खौफ़
आज की सबसे बड़ी सफलता यही है कि जनता पुलिस पर गर्व कर रही है और अपराधी दहशत में हैं।
जनता जानती है कि उनकी शिकायत सुनी जाएगी।
अपराधियों को मालूम है कि ऊधम सिंह नगर में अपराध कर बचना असंभव है।
उत्तराखंड पुलिस की प्रतिष्ठा दिन-प्रतिदिन मज़बूत हो रही है।
उत्तराखंड की परिकल्पना और पुलिस की भूमिका?
जब उत्तराखंड राज्य बना था, तो इसके पीछे मुख्य उद्देश्य था—भ्रष्टाचार मुक्त, सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा और उनकी टीम ने अपने काम से यह दिखा दिया है कि यह सपना अभी भी जीवित है और धीरे-धीरे साकार हो रहा है। उनका नेतृत्व एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है, जिसे पूरे राज्य की पुलिसिंग में लागू किया जा सकता है।
आज ऊधम सिंह नगर की पुलिस सिर्फ एक जिले की ताकत नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड पुलिस के लिए प्रेरणा है।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा की अगुवाई में जिस तरह अपराधियों पर लगातार प्रहार हो रहे हैं, उससे देवभूमि की गरिमा बनी हुई है।
यह गर्व की बात है कि पुलिस केवल कानून का पालन ही नहीं करा रही, बल्कि “जन-जन के विश्वास की प्रहरी” बन चुकी है।
अपराधियों के लिए अब यह संदेश साफ है—
“देवभूमि में अपराध कर बचना नामुमकिन है।”
और जनता के लिए यह विश्वास भी पक्का है—
“खाकी वर्दी हमारी ढाल है, मिश्रा जी हमारे प्रहरी हैं।”
✍️ लेखक: अवतार सिंह बिष्ट
(संपादकीय स्तंभकार, उत्तराखंड मुद्दों पर विशेष लेखन)

