कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पेंशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बदलाव की योजना बनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, EPFO वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव रख रहा है।

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यदि यह परिवर्तन लागू होता है, तो देशभर में 1 करोड़ से अधिक कर्मचारी EPS पेंशन के दायरे में आ जाएंगे। यह सीमा 2014 में 6,500 रुपये से बढ़ाई गई थी और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

EPFO की पेंशन योजना EPS के तहत एक निश्चित वेतन सीमा निर्धारित की गई है। वर्तमान में यह सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है, जिसका अर्थ है कि यदि किसी कर्मचारी का वेतन 25,000 रुपये या उससे अधिक है, तो भी पेंशन की गणना केवल 15,000 रुपये के आधार पर की जाती है। प्रस्तावित बदलाव से यह सीमा 25,000 रुपये करने का लक्ष्य है, जिससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों की पेंशन राशि में वृद्धि होगी।

पुरानी सीमाओं में बदलाव की आवश्यकता

पुराने सिस्टम में बदलाव जरूरी!

मुंबई में एक बिजनेस इवेंट के दौरान, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने इस बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक है कि 15,000 रुपये से थोड़ा अधिक कमाने वाले लोग पेंशन के दायरे में नहीं आते और उन्हें बुजुर्ग होने पर अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पुरानी सीमाओं को बदलना आवश्यक है, क्योंकि ये आज के भारत की आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाती हैं।

वर्तमान नियमों के अनुसार, केवल वे कर्मचारी जिनका मूल वेतन 15,000 रुपये तक है, उन्हें EPF और EPS में शामिल किया जाता है। इससे अधिक कमाने वाले कर्मचारी इस योजना से बाहर रह जाते हैं, जिससे उन्हें रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत नहीं मिल पाती है।

EPS में प्रस्तावित बदलाव

EPS में नए बदलाव

कर्मचारी पेंशन योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की दीर्घकालिक सुरक्षा को बढ़ाना और पेंशन प्रणाली को मजबूत करना है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि EPS की राशि निकालने के लिए इंतज़ार की अवधि 2 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दी गई है। इसका मतलब है कि कर्मचारी अपनी EPS राशि केवल तभी निकाल सकेंगे जब वे 3 साल तक नौकरी न करें या बेरोजगार रहें। इस कदम का उद्देश्य समय से पहले निकासी को रोकना और लोगों को लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

इसके अलावा, सरकार न्यूनतम पेंशन की 1,000 रुपये प्रति माह की सीमा की समीक्षा कर रही है, जो पिछले 11 वर्षों से अपरिवर्तित है। श्रम संबंधी संसदीय समिति ने इसे बढ़ाने की सिफारिश की है, और उम्मीद है कि जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। इससे बढ़ती महंगाई से प्रभावित पेंशनधारकों को राहत मिलेगी.


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