

“मृत्यु अंतिम सत्य है, लेकिन सेवा अमर होती है”—इस कथन को गदरपुर निवासी स्वर्गीय श्री प्रेम मदान ने अपने नेत्रदान के माध्यम से सार्थक कर दिया। देहावसान के पश्चात उनके नेत्र दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला भरेंगे। यह नेत्रदान न केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
इस पुण्य कार्य में उनके पुत्र श्री गौरव मदान द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी अनुकरणीय है। शोक की घड़ी में भी नेत्रदान हेतु सहमति देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि मानव सेवा का मार्ग भावनाओं से ऊपर उठकर भी चुना जा सकता है।
सोचो डिफरेंट संस्था के पदाधिकारियों संदीप चावला एवं विकास भूसरी के प्रयासों से यह नेत्रदान संभव हो सका। महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एस.के. मित्तल की उपस्थिति में, सी.आर. मित्तल नेत्रदान केंद्र के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एल.एम. उप्रेती के निर्देशन में आई-टेक्नीशियन मनीष रावत द्वारा सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर प्रक्रिया संपन्न की गई।
इस अवसर पर ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने मदान परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सोचो डिफरेंट संस्था, भारत विकास परिषद एवं अन्य स्वयंसेवी संगठनों के योगदान की सराहना की।
आज जब समाज में स्वार्थ और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है, ऐसे उदाहरण यह विश्वास दिलाते हैं कि मानवता अभी जीवित है। नेत्रदान जैसे महादान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है, ताकि मृत्यु के बाद भी जीवन की रोशनी फैलती रहे।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स स्वर्गीय श्री प्रेम मदान जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। नेत्रदान जैसे महादान के माध्यम से उन्होंने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा की। उनका यह पुण्य कार्य समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।




