✍️ अवतार सिंह बिष्ट | संपादकीय लेख
देहरादून में हाल ही में नकली दवा तैयार कर बाजार में बेचने वाले दो और आरोपितों की गिरफ्तारी ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। एसटीएफ अब तक 12 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और चौंकाने वाली बात यह है कि एक फर्जी फर्म के बैंक खातों में पिछले दो वर्षों में करीब 14 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य से किया गया घिनौना खिलवाड़ है।
नकली दवाइयों से बड़ा खतरा?नकली दवाओं का कारोबार केवल एक वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह सीधा हत्या जैसा अपराध है। जब रोगी दवा की दुकान से जीवन बचाने की उम्मीद में दवा खरीदता है और उसे नकली गोली, पाउडर या इंजेक्शन मिलता है, तो वह न केवल बीमारी से लड़ने की ताकत खो देता है बल्कि उसकी जान पर भी खतरा मंडरा उठता है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में इन नकली दवाइयों की सप्लाई का मतलब है – स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ को तोड़ देना।
