वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. हालांकि ज्यादातर ध्यान घरेलू प्राथमिकताओं पर रहा लेकिन बजट ने भारत की सीमाओं से परे भी काफी मजबूत संकेत दिए हैं.

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विदेशी सहायता आवंटन में बदलाव का कई पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार देशों पर सीधा असर पड़ा है. आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से किन देशों को तगड़ा नुकसान हुआ है.

बांग्लादेश को सबसे बड़ा झटका

सभी देशों में बांग्लादेश भारत के नवीनतम बजट से काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है. बांग्लादेश को वित्तीय सहायता में लगभग 50% की कटौती की गई है. यह पिछले साल के ₹120 करोड़ से घटकर सिर्फ ₹60 करोड़ रह गई है. इस भारी कटौती को ढाका में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ा जा रहा है. यह कटौती एक साफ राजनयिक संदेश देती है. ऐसा इसलिए क्योंकि बांग्लादेश पारंपरिक रूप से भारतीय विकास सहायता का एक बड़ा लाभार्थी रहा है.

ईरान के चाबहार बंदरगाह के लिए शून्य आवंटन

भारत के ईरान के साथ जुड़ाव में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. बजट में रणनीतिक रूप से जरूरी चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है. आपको बता दें कि इसे पहले मध्य एशिया और अफगानिस्तान के लिए भारत का प्रवेश द्वार माना जाता था. ऐसा माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और भू राजनीतिक जोखिम से संबंधित चिंताएं इस फैसले के पीछे प्राथमिक कारण है. फंडिंग की गैर मौजूदगी भारत की सबसे महत्वपूर्ण विदेशी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक में एक जरूरी ठहराव का संकेत देती है.

म्यांमार को मामूली कटौती का सामना करना पड़ा

म्यांमार को दी जाने वाली सहायता को ₹350 करोड़ से घटाकर ₹300 करोड़ कर दिया गया है. म्यांमार के लिए भारत की सहायता मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे और मानवीय जरूरत पर केंद्रित रही है. लेकिन चल रही आंतरिक अस्थिरता और सुरक्षा चिंता की वजह से फंडिंग में कटौती का फैसला लिया गया है.

किसे हुआ फायदा

जिस तरफ कुछ देशों को नुकसान हुआ है वहीं कई देशों को फायदा भी हुआ है. भारत में भूटान को दी जाने वाली सहायता में वृद्धि की है. भूटान का आवंटन बढ़कर 2288 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसी के साथ नेपाल को दी जाने वाली मदद बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दी गई है. वहीं श्रीलंका को ₹400 करोड़ की बड़ी मदद मिली है.


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