रुद्रपुर/देहरादूनचिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण में हो रही लगातार देरी को लेकर चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक, पूर्व राज्य मंत्री एवं कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने राज्य सरकार पर कड़ा नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री द्वारा छह माह का समय दिए जाने के बावजूद अब तक आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण से संबंधित नया शासनादेश (जीओ) जारी नहीं किया गया, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि दिल्ली के 300 से अधिक आंदोलनकारी इस जीओ का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि उत्तराखंड के हजारों आंदोलनकारी आज भी चिन्हिकरण से वंचित हैं। उन्होंने इस संबंध में आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री सुभाष बरतवाल से फोन पर वार्ता कर दुख और नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिसंबर और जनवरी बीत चुके हैं, फरवरी आने वाली है, लेकिन अब तक सरकार केवल “जल्द जारी होगा” का आश्वासन दे रही है। आखिर यह “जल्द” कब आएगा, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
धीरेंद्र प्रताप ने घोषणा की कि दिल्ली के आंदोलनकारियों की बैठक 2 फरवरी को बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इसके बाद 7 फरवरी को देहरादून में वे विभिन्न आंदोलनकारी संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर संयुक्त रणनीति तैयार करेंगे।
उन्होंने यूजीसी से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार के फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत किया, वहीं राज्य में मंदिरों में केवल हिंदुओं के प्रवेश के मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि “भारत मां के चार सिपाही—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—हमेशा एकता की नीति पर चले हैं और देश आगे भी इसी रास्ते पर चलेगा।” देश की एकता और अखंडता की कीमत पर किसी भी तरह के विभाजनकारी प्रयासों को नाकाम किया जाएगा।
धीरेंद्र प्रताप ने अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की घोषणा के क्रियान्वयन में हो रही देरी पर भी नाराज़गी जताई। साथ ही सरकार द्वारा आंदोलनकारी संगठनों और विपक्षी दलों के दबाव में गैरसैंण में बजट सत्र बुलाने के निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि हिंदू मंदिरों में अन्य धर्मों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार किया जाए और राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण का शासनादेश शीघ्र जारी कर वर्षों से लंबित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
