गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में से एक प्रमुख ग्रंथ है. यह वैष्णव संप्रदाय से संबंधित है और इसमें जीवन, मृत्यु और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का गहन वर्णन मिलता है.

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इस ग्रंथ के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा कुछ समय तक पृथ्वी लोक पर रहती है और फिर नए शरीर की तलाश करती है. आत्मा को नया शरीर मिलने में कभी 3 दिन, 10 दिन, 13 दिन, सवा महीना या एक वर्ष तक का समय लग सकता है. लेकिन जो आत्माएं किसी कारणवश नया शरीर नहीं पा पातीं, वे पितृलोक या स्वर्गलोक की ओर चली जाती हैं. हालांकि, गरुड़ पुराण यह भी बताता है कि जिन लोगों का अंतिम संस्कार शास्त्रीय नियमों के अनुसार नहीं किया जाता, उनकी आत्माओं को न तो पितृलोक में स्थान मिलता है और न ही उन्हें शांति प्राप्त होती है. ऐसी आत्माएं धरती पर भटकती रहती हैं। इसलिए, मृत्यु के बाद धार्मिक नियमों के अनुसार कर्मकांड और संस्कार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

इन चार कर्मों के बिना आत्मा को नहीं मिलती शांति

मटके की परिक्रमा और फोड़ने की रस्म- मृतक को चिता पर लिटाने के बाद परिजन या संतान को एक मटके में पानी भरकर शव की परिक्रमा करनी चाहिए. इस मटके में एक छेद अवश्य किया जाता है और परिक्रमा पूरी होने के बाद उसे फोड़ दिया जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, यह प्रक्रिया आत्मा को परिवार से मोह-माया मुक्त करती है और उसे धरती लोक से विदा लेने में सहजता प्रदान करती है.

अंतिम स्नान और नए वस्त्र- चाहे स्त्री हो या पुरुष, अंतिम संस्कार से पहले शव को स्नान कराना आवश्यक है. स्नान के बाद शरीर पर चंदन, घी या तेल लगाया जाता है और नए या स्वच्छ वस्त्र पहनाए जाते हैं. इस विधि को आत्मा की शारीरिक देह से विदाई का प्रतीक माना गया है, जिससे आत्मा आसानी से अपने शरीर का त्याग कर सकती है.

चिता में लकड़ी डालने के बाद पीछे न देखें- अंतिम संस्कार के दौरान जब परिजन चिता में लकड़ी या कंडे का टुकड़ा डाल दें, तो उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. गरुड़ पुराण बताता है कि ऐसा करने से आत्मा को यह अनुभव होता है कि परिवारजन उससे विरक्त हो चुके हैं. इससे उसका मोह समाप्त होता है और वह अगले लोक की ओर आगे बढ़ जाती है.

सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार न करें- अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका दाह संस्कार अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार, रात के समय शव को जलाना या दफनाना अशुभ माना गया है, क्योंकि इससे आत्मा को शांति नहीं मिलती और वह भटकती रहती है. इसीलिए रात्रि में शव को घर पर ही रखकर सुबह विधि-विधान से संस्कार करना चाहिए.


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