

ये मामला कर्मियों के वेतन निर्धारण और उन्हें मिले वित्तीय लाभों से जुड़ा था। लेखा परीक्षा दल की आपत्तियों के आधार पर सक्षम अफसरों ने यह कहते हुए वसूली के आदेश दिए थे कि वेतन निर्धारण में गलती से कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन और इंक्रीमेंट का लाभ दे दिया गया था। यह वसूली मुख्य रूप से 27 मई 2019 के जीओ पर आधारित थी।

याचिकाकर्ताओं की क्या दलील
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि उन्हें मिला भुगतान सक्षम अधिकारियों की ओर से नियमानुसार दिया गया था। लंबे समय बाद एकतरफा वसूली करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि समान मुद्दे पर समन्वय पीठ पहले ही लेखा परीक्षा रिपोर्ट और 27 मई 2019 का जीओ रद्द कर चुकी है। इसी आधार पर कोर्ट ने वर्तमान याचिकाएं स्वीकार करते हुए वसूली आदेश रद्द कर दिए।
सरकार का क्या था तर्क
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि कर्मियों ने संशोधित वेतनमान के समय अंडरटेकिंग दे रखी थी, जिससे वसूली उचित है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला भी दिया, पर कोर्ट ने तर्कों को स्वीकार नहीं किया। स्पष्ट किया कि वेतन का पुनर्निर्धारण नियमों के अनुरूप भविष्य में किया जा सकता है, लेकिन पूर्व में जारी वसूली आदेश तुरंत प्रभाव से निरस्त रहेंगे।




