राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा-2022 में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के खुलासे लगातार हो रहे हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में अब तक पेपर लीक और फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने वाले कई उम्मीदवार गिरफ्तार हो चुके हैं।

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ताजा गिरफ्तारी रविवार को कविता लखेरा की हुई है, जिसने भाई दीपक के जरिए 25 लाख में पेपर खरीदा था।

Who is Kavita Lakhera: कविता लखेरा अर्थशास्‍त्र की लेक्‍चचर

राजस्‍थान प्राध्यापक अर्थशास्त्र (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में पेपर लीक मामले में पकड़ी गई कविता लखेरा जयपुर के पास सांगानेर की माल की ढाणी की रहने वाली है। वर्तमान में कविता लखेरा राजस्‍थान के ब्‍यावर के जालिया प्रथम ब्‍लॉक जवाजा में राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में अर्थशास्‍त्र की लेक्‍चचर है।

एसओजी की पूछताछ में खुलासा हुआ कि परीक्षा से एक दिन पहले कुछ अभ्यर्थियों को एक स्थान पर रुकवाकर वहीं पेपर रटवाया गया। कविता ने भी दोनों दिन के पेपर पढ़कर परीक्षा दी और मेरिट में 20वां स्थान प्राप्त किया। मीडिया की खबरों के अनुसार एडीजी (एसओजी) वीके सिंह ने बताया कि कविता लखेरा को जयपुर से गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है।

एसओजी के अनुसार आरपीएससी की ओर से 15 और 16 अक्‍टूबर 2022 को आयोजित परीक्षा का पेपर लीक होने की सूचना मिली थी। लंबी जांच के बाद 10 अप्रैल 2025 को एसओजी थाने में मामला दर्ज किया गया। सबसे पहले दीपक लक्षकार को पकड़ा। उसकी गिरफ्तारी के बाद कविता लखेरा फरार हो गई थी। जिससे उस पर भी शक बढ़ गया था।

दो किश्तों में दी गई रकम, प्लॉट बेचना पड़ा

एसओजी की जांच में पता चला था कि दीपक ने अपनी बहन कविता लखरा के लिए टोंक निवासी ओमप्रकाश गुर्जर के जरिए पेपर खरीदा। 12 लाख रुपए परीक्षा से पहले और 13 लाख रुपए सिलेक्शन के बाद दिए गए, जिसके लिए एक प्लॉट बेचना पड़ा। इस मामले में राम रतन, गणपत विश्नोई, रामचंद्र मीणा और पुरुषोत्तम लखेरा जैसे अन्य लोग भी शामिल थे। मोबाइल चैटिंग खंगालने पर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

फर्जी डिग्री मामले में भी SOG की कार्रवाई

इसी भर्ती परीक्षा के हिंदी विषय में भी फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। दो युवतियों कमला कुमारी बिश्नोई और ब्रह्माकुमारी ने फर्जी एमए डिग्री लगाकर परीक्षा पास की थी।

पूर्व में एसओजी की पूछताछ में दोनों युवतियों ने बताया कि फर्जी डिग्री उनके भाइयों ने उपलब्ध कराई थी। कमला ने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा की डिग्री बताकर आवेदन किया था, लेकिन नियुक्ति के समय मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार की डिग्री लगाई।

दोनों अभ्यर्थियों ने 2022 में आयोजित परीक्षा में क्रमश: 7वीं और 36वीं रैंक प्राप्त की थी। डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के दौरान दोनों गायब रहीं, लेकिन बाद में पहुंचीं तो सिविल लाइन थाना पुलिस को सौंपा गया। पूछताछ में इनके भाई सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश बिश्नोई को भी गिरफ्तार किया गया था।

Rajasthan Paper Leak Case: सांचौर बना फर्जीवाड़े का गढ़

एसओजी के मुताबिक पेपर लीक और फर्जी डिग्री मामलों में अब तक 90 आरोपी चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 70 आरोपी सांचौर जिले से हैं। दोनों युवतियों को फिलहाल सात दिन की रिमांड पर लिया गया है और उनके जरिए अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। एसओजी अब मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार को लेकर भी जांच कर रही है, जहां से फर्जी डिग्री ली गई थी। इन डिग्रियों के जरिए कई अभ्यर्थियों ने लेक्चरर परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की।


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