

खास बात यह है कि 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन यह सूर्यग्रहण लगेगा. भारत में यह दृश्य दिखाई नहीं देगा, फिर भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आइए जानते हैं सूर्यग्रहण के आरंभ, समापन, सूतक काल और इससे जुड़ी पूरी जानकारी.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
कहां दिखाई देगा यह सूर्यग्रहण21 सितंबर का यह खंडग्रास सूर्यग्रहण…
कहां दिखाई देगा यह सूर्यग्रहण21 सितंबर का यह खंडग्रास सूर्यग्रहण अंटार्कटिका, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण प्रशांत के आस-पास के क्षेत्रों और ऑस्ट्रेलिया में आंशिक रूप से दिखाई देगा. भारत में इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा.
Published on: 2025-09-20T13:51:53+05:30
राशियों पर प्रभावज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण सभी 12 राशियों…
राशियों पर प्रभावज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण सभी 12 राशियों को प्रभावित कर सकता है. कुछ राशियों के लिए यह समय शुभ फल देने वाला होगा, जबकि कुछ के लिए चुनौतियां ला सकता है.
Published on: 2025-09-20T13:51:47+05:30
सूर्यग्रहण का सूतक कालसूर्यग्रहण का सूतक काल सामान्यतः ग्रहण से…
सूर्यग्रहण का सूतक कालसूर्यग्रहण का सूतक काल सामान्यतः ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है और इस दौरान शुभ कार्य नहीं किए जाते. गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. हालांकि, चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे.
कल लगेगा साल का आखिरी सूर्यग्रहणसाल 2025 का आखिरी सूर्यग्रहण…
कल लगेगा साल का आखिरी सूर्यग्रहणसाल 2025 का आखिरी सूर्यग्रहण (Surya Grahan 2025) रविवार, 21 सितंबर को होगा. यह खंडग्रास सूर्यग्रहण भारतीय समयानुसार रात 10:59 बजे शुरू होकर सुबह 3:23 बजे तक चलेगा. इसका मध्यकाल रात 1:11 बजे रहेगा और कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट की होगी.
2025:साल 2025 में 7 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है. पितरों के बिना हम अपना जीवन खुशहाली से व्यतीत नहीं कर सकते. पितृपक्ष के दौरान 15 दिनों तक पितृ पृथ्वी पर आते हैं. पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं. श्राद्ध न करने से पितरों की आत्मा को मुक्ति नहीं मिल पाती. पितृपक्ष में दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है. इस दौरान पूजा-पाठ करना और पितरों का स्मरण करना भी शुभ होता है.श्राद्ध पक्ष को भावना-प्रधान के साथ-साथ क्रिया-प्रधान भी माना जाता है. मन में पितरों को याद करना और उनके लिए भक्ति भाव रखना अलग है, लेकिन उसके साथ-साथ कर्म करना भी आवश्यक है. इसलिए पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने से ही पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.साल 2025 में पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या है. यह पितृपक्ष का समापन दिवस है. इस दिन साल का आखिरी ग्रहण लगने वाला है. साल का अंतिम ग्रहण सूर्य ग्रहण होगा.
सर्वपितृ अमावस्या के दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारत के समयानुसार यह ग्रहण रात के 11 बजे लगेगा, इसका सूतक काल 12 घंटे पहले लग जाएगा, यानी सुबह 11 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा. ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा, क्योंकि यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा. इस कारण, जो लोग सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म करेंगे, उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा.
कब और कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?
साल 2025 का आखिरी सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगेगा. यह रात 11 बजे से शुरू होकर अगले दिन 22 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा. यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा. इसे दक्षिण प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ भागों से देखा जा सकेगा.
सूर्य ग्रहण के दिन क्या करें?
सूर्य ग्रहण के दिन दान-पुण्य अवश्य करें, इसे श्रेष्ठ माना गया है.
वे चीज़ें दान करें जो आपके पूर्वजों को प्रिय रही हों.
श्रद्धा भाव से अपने पूर्वजों का स्मरण




