

देसी फाइटर जेट का काम सिर्फ इसलिए रुका है कि इंजन की सप्लाई समय पर नहीं हो पा रहा है. इसे देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर जेट इंजन बनाने का प्रयास तेज कर दिया है. उम्मीद है आने वाले कुछ सालों में देश में ही जेट इंजन बनाए जा सकें. दूसरी तरफ, मिसाइल, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भी डेवलप किए जा रहे हैं. खासकर वायु सुरक्षा प्रणाली पर स्पेशल फोकस है. 21वीं सदी में युद्ध का स्वरूप बदल चुका है. अब जमीनी के बजाय आसमानी युद्ध बेहद अहम हो चुके हैं. ऐसे में फाइटर जेट में ऐसे वेपन सिस्टम को इंटीग्रेट करना जरूरी हो गया है, जिससे दुश्मन की कमर एक ही झटके में तोड़ा जा सके. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का सफल ट्रायल किया गया है. टू-स्टेज वाले इस बम से जमीन पर स्थित टारगेट को पलभर में मिट्टी में मिलाया जा सकता है. यह एयर-टू-सरफेस वॉरगेम की थ्योरी पर काम करता है.

दरअसल, भारत ने लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि DRDO ने एयर-लॉन्च्ड लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (LRGB) का सफल परीक्षण किया है, जिसे लड़ाकू विमान Su-30MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया गया. इस ग्लाइड बम को ‘गौरव’ का नाम दिया गया है इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व DRDO कर रहा है और LRGB को दो अलग-अलग वेरिएंट में विकसित किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग तरह के मिशनों में इस्तेमाल किया जा सके. मई में कैरेज ट्रायल किया गया जिसमें सभी टेस्ट पॉइंट सफल रहे और यह साबित हुआ कि बम को विमान के साथ सुरक्षित रूप से इंटीग्रेट किया जा सकता है. अगस्त में रिलीज फ्लाइट ट्रायल किया गया और इसमें बम के अलग होने, उड़ान व्यवहार और गाइडेंस सिस्टम को सफल बताया गया. दोनों वेरिएंट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उन्हें Su-30MKI के कई स्टेशनों पर फिट किया जा सके, जिससे मिशन के समय ज्यादा लचीलापन मिलेगा.
गौरव ग्लाइड बम इसलिए है अहम -:
- दुश्मन की वायु रक्षा सीमा (Air Defense Envelope) के बाहर से लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता
- महंगी क्रूज मिसाइलों की तुलना में कम लागत और काफी सस्ता
- विशेष प्रकार के वारहेड प्रभावों के साथ हाई प्रिसीजन अटैक
- Su-30MKI फाइटर जेट के बेड़े के सभी विमानों से इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा
- लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम गौरव का वजन 1000 किलो है

11 अप्रैल 2025 को पीआईबी द्वारा जारी तस्वीर में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किए गए लंबी दूरी के ग्लाइड बम ‘गौरव’ के सफल रिलीज ट्रायल के दौरान Su-30MKI फाइटर जेट. (फोटो: PTI)
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, गौरव लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम के दो संस्करण हैं, जिन्हें वॉरहेड की क्षमता के आधार पर अलग-अलग किया गया है. वे इस प्रकार हैं -:
- Pre-Fragmented Blast (PF) वॉरहेड: इसे नरम सतह वाले या ओपन टारगेट्स पर बड़े क्षेत्र में असर डालकर हमला करने के लिए बनाया गया है.
- Penetration-cum-Blast (PCB) वॉरहेड: इसे सख्त और मजबूत संरचनाओं (hardened and fortified targets) जैसे बंकर, कमांड पोस्ट और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को भेदकर नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है.
दुश्मनों के लिए साबित होगा काल
ग्लाइड बम का Gaurav-PCB वेरिएंट 2024 में दो बड़े डेवलपमेंट लक्ष्य हासिल कर चुका है. यह वेरिएंट खास तौर पर कठोर और और बहुत ही सुरक्षित सैन्य ढांचों पर गहरा प्रहार करने के लिए बनाया गया है. यह क्षमता खासकर पहाड़ी इलाकों में मौजूद बंकरों और सुरक्षित लॉजिस्टिक हब पर हमलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जब दूसरा PF वेरिएंट भी परीक्षण पूरा करेगा और सेना में शामिल होगा, तब सॉफ्ट स्ट्रैटजिक टारगेट्स पर प्रिसिजन सैचुरेशन स्ट्राइक और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा. LRGB के सफल परीक्षण के बाद यह प्रणाली भारत के अन्य स्वदेशी हथियारों जैसे रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल, SAAW (स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन) और ब्रह्मोस-A के साथ मिलकर वायुसेना को और मजबूत बनाएगी. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह परीक्षण दिखाता है कि भारत लंबी दूरी, सटीकता और सुरक्षित दूरी से हमला करने की अपनी नीति को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.




