भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और आने वाले सालों में भी उसकी विकास दर मजबूत रहने की उम्मीद है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेंगलुरु में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प समावेश’ कार्यक्रम में यह दावा करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार आर्थिक मजबूती दिखा रहा है।

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उन्होंने कहा कि तिमाही दर तिमाही और साल दर साल भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

वित्त मंत्री ने इस दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे लगातार देश की उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिश करते हैं और हर बार किसी बड़े आर्थिक संकट की भविष्यवाणी करते हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। सीतारमण ने कहा कि कोविड महामारी, वैश्विक आर्थिक मंदी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी गंभीर चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है और देश किसी बड़े संकट की ओर नहीं बढ़ रहा है।

आंकड़ों में भारत की आर्थिक प्रगति

वित्त मंत्री के अनुसार, भारत की आर्थिक प्रगति केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पिछले साल के 7.1 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से भी बेहतर साबित हुई। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि, महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही हैं। भारत का मजबूत उपभोक्ता बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे में निवेश और उत्पादन आधारित नीतियां विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका की व्यापार नीतियां, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकती हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पहले चालू वित्त वर्ष में 7 से 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अब इस अनुमान पर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि यदि आर्थिक स्थिरता बनाए रखी गई और सुधारों की गति जारी रही, तो भारत अगले कुछ सालों में फिर से 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल कर सकता है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। सरकार का दावा है कि देश विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की आर्थिक शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत होकर उभर सकता है।


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