India War CDS Anil Chauhan Alert: देश की सीमाओं पर बदलते हालात और दुनिया में चल रहे संघर्षों के बीच भारत को लेकर एक बड़ा संदेश सामने आया है। यह संदेश सतर्कता, तैयारी और मजबूती का है।

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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि भारत को सिर्फ अचानक होने वाले छोटे युद्धों के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के लिए भी खुद को पूरी तरह तैयार रखना होगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

आईआईटी बॉम्बे से देश को चेतावनी

आईआईटी बॉम्बे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान ने भारत की सुरक्षा से जुड़े अहम पहलुओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत के सामने मौजूद खतरे सिर्फ एक तरह के नहीं हैं। आतंकवादी घटनाएं, सीमाओं पर तनाव और पड़ोसी देशों के साथ जमीनी विवाद, ये सभी ऐसे कारण हैं जिनके चलते भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है। उनका कहना था कि तैयारी ऐसी होनी चाहिए, जो हर स्तर पर काम आए।

परमाणु ताकत वाले पड़ोसी और बढ़ती चुनौती

जनरल चौहान ने पाकिस्तान और चीन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके संकेत साफ थे। उन्होंने कहा कि भारत के दोनों प्रमुख दुश्मन परमाणु हथियारों से लैस हैं। ऐसे में किसी भी तरह की रणनीतिक चूक बहुत भारी पड़ सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को उस सीमा का उल्लंघन नहीं होने देना चाहिए, जहां हालात बेकाबू हो जाएं। यही वजह है कि सोच-समझकर और संतुलित तैयारी बेहद जरूरी है।

दो तरह के युद्धों के लिए तैयार भारत

सीडीएस ने स्पष्ट किया कि भारत को दो तरह के संघर्षों के लिए तैयार रहना होगा। पहला, कम समय के लेकिन बेहद तीव्र संघर्ष, जैसे आतंकवाद के खिलाफ की जाने वाली सटीक और तेज कार्रवाई। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कम समय में निर्णायक जीत हासिल की जा सकती है। दूसरा, लंबे समय तक चलने वाले जमीनी संघर्ष, जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, जहां हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत की कोशिश ऐसे संघर्षों से दूर रहने की ही होनी चाहिए।

आधुनिक युद्ध की नई तस्वीर

आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर बात करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि दुनिया मिलिट्री मामलों में तीसरी क्रांति के दौर से गुजर रही है। उन्होंने इसे कनवर्जेंस वॉरफेयर का नाम दिया। उनके अनुसार भविष्य में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन जाएगा। जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष, सभी क्षेत्रों में एकसाथ कार्रवाई ही जीत की कुंजी होगी।

ऑपरेशन सिंदूर से मिला साफ सबक

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। करीब चार दिन चले इस ऑपरेशन में भारत ने सभी मोर्चों पर एकसाथ पूरी ताकत से कार्रवाई की और निर्णायक जीत हासिल की। यही मॉडल आने वाले समय में भारत की सैन्य रणनीति की दिशा तय करेगा।


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