

यह प्रोजेक्ट फ़िलिस्तीनियों द्वारा भविष्य के राज्य के लिए दावा किए गए इलाके को दो हिस्सों में बांटा जाएगा. उन्होंने आगे कहा, “हम अपनी विरासत, अपनी ज़मीन और अपनी सुरक्षा की रक्षा करेंगे.”

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
लंबे वक्त से विवादित ई1 प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय के योजना आयोग से अंतिम मंज़ूरी मिल गई है. इस एक्सपैंशन के तहत यरुशलम के पूर्व में एक भूखंड पर हज़ारों नए आवासों का निर्माण किया जाना था.
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों सहित आलोचकों ने चेतावनी दी है कि यह प्रोजेक्ट वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में बांट देगा, जिससे क्षेत्र के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से अलग हो जाएंगे और पूर्वी यरुशलम प्रभावी रूप से अलग-थलग पड़ जाएगा. उनका तर्क है कि इससे भौगोलिक रूप से फ़िलिस्तीनी स्टेट की स्थापना लगभग नामुमकिन हो जाएगी.
यूएन एसेंबली में फिलिस्तीनी स्टेट को मिल सकती है मान्यता
गुरुवार को वेस्ट बैंक में एक प्रमुख यहूदी बस्ती परियोजना के लिए एक हस्ताक्षर समारोह में बोलते हुए इस्राइली प्रधानमंत्री ने ये बात कही। यह समारोह यरुशलम के पूर्व में स्थित यहूदी बस्ती माले अदुमिम में आयोजित किया गया और इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।
नई यहूदी कालोनी पर लंबे समय से है विवाद
कार्यक्रम के दौरान इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि हम अपना वादा पूरा करेंगे और कोई फलस्तीनी राज्य नहीं होगा, ये हमारी जमीन है। हम अपनी विरासत, अपनी जमीन और अपनी सुरक्षा की रक्षा करेंगे। हम शहर की आबादी को दोगुना करने जा रहे हैं। इस्राइल वेस्ट बैंक में लंबे समय से E1 नामक करीब 12 वर्ग किलोमीटर जमीन पर यहूदी बस्ती बसाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विरोध के कारण वर्षों से यह योजना अटकी हुई थी। जिस जगह नई बस्ती E1 बनाई जा रही है, वह इस्राइली बस्ती माले अदुमिम और यरुशलम के बीच का इलाका है। गौरतलब है कि नई बस्ती फलस्तीन के उत्तरी और दक्षिणी इलाकों को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित है।
यूएन ने जताई चिंता
पिछले महीने इस्राइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने इस बेहद संवेदनशील जगह पर 3400 घरों वाली यहूदी बस्ती बसाने की योजना का खुलकर समर्थन किया था। हालांकि स्मोट्रिच के इस कदम की संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से फलस्तीनी राज्य के अस्तित्व को खतरा पैदा होगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी तट पर बनीं सभी इस्राइली बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानी जाती हैं। ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई पश्चिमी देशों की सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में फलस्तीन को अलग देश की मान्यता देने का एलान किया है। ब्रिटेन ने कहा है कि अगर इस्राइल गाजा में शुरू हुए विनाशकारी युद्ध को तुरंत खत्म नहीं करता है तो उन्हें फलस्तीन को देश की मान्यता देने का कदम उठाना पड़ेगा।
द्वि-राज्य समाधान की संभावनाओं को खतरा
हालांकि भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इस्राइल के दक्षिणपंथी लोग खुलकर संवेदनशील इलाके में यहूदी बस्ती बनाने का समर्थन कर रहे हैं। पश्चिमी तट की बस्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले इस्राइली एनजीओ पीस नाउ का कहना है कि E1 बस्ती के निर्माण का काम कुछ महीनों में ही शुरू हो सकता है और करीब एक साल के भीतर आवासों का निर्माण शुरू हो जाएगा। एनजीओ ने चेतावनी दी कि ई1 योजना से इस्राइल के भविष्य और द्वि-राज्य समाधान की संभावना को खतरा पैदा हो सकता है।




