कानून बनाम दबाव की राजनीति: भूमाफिया, रंगदारी और राजनीतिक संरक्षण पर बड़ा सवाल

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रुद्रपुर काशीपुर में सामने आया रंगदारी और अवैध कब्जे का मामला अब केवल एक फ्लैट विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड में वर्षों से पनप रही भूमाफिया संस्कृति और उसके कथित राजनीतिक संरक्षण का प्रतीक बनता जा रहा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

जिला विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध कॉलोनियों, फर्जी नक्शों और गलत रजिस्ट्रियों पर की जा रही सख्त कार्रवाई के बीच राजनीतिक दबाव और धरना-प्रदर्शन ने कानून बनाम दबाव की राजनीति को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
वेदांत हाइट्स, कटोराताल स्थित 3 बीएचके फ्लैट पर अवैध कब्जे और 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के आरोपों ने पूरे नेटवर्क की असलियत उजागर कर दी है। स्टेडियम रोड निवासी मनोज जैन की तहरीर के अनुसार, आरोपियों ने न केवल कब्जा किया बल्कि जान से मारने और फ्लैट में दफन करने तक की धमकी दी। पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच रुद्रपुर–किच्छा रोड स्थित डायनामिक गार्डन सिटी में प्लॉट आवंटन के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला भी सामने आया है। पुलिस लाइन में तैनात दो कांस्टेबलों की तहरीर के अनुसार, लगभग 28 लाख रुपये का भुगतान, मार्च 2023 में जारी अलॉटमेंट लेटर और प्राधिकरण व रेरा से स्वीकृति का दावा होने के बावजूद न तो रजिस्ट्री हुई और न ही धनवापसी। छह माह में दोगुनी राशि लौटाने का वादा भी पूरा नहीं हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि की गई कार्रवाई सरकार की गाइडलाइन के उल्लंघन के कारण है। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दलों द्वारा धरना-प्रदर्शन और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिशों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अवैध कॉलोनियों को “गरीबों का मुद्दा” बताकर असल में भूमाफियाओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों—रुद्रपुर, काशीपुर, पंतनगर और सितारगंज—में अवैध प्लॉटिंग, स्टांप ड्यूटी घोटाले और काले धन का एक संगठित नेटवर्क वर्षों से सक्रिय रहा है। 5 एकड़ की अनुमति लेकर 30–50 एकड़ तक अवैध कॉलोनियां काटने, सर्किल रेट पर रजिस्ट्री और शेष रकम नकद लेने जैसे आरोप इस नेटवर्क की गहराई को दर्शाते हैं।
प्राधिकरण की हालिया कार्रवाई को जनता ने सराहा है, लेकिन साथ ही यह मांग भी तेज हो गई है कि पूरे प्रकरण की SIT जांच, स्टांप ड्यूटी घोटालों की पड़ताल, शीर्ष भूमाफियाओं की संपत्ति जांच और राजनीतिक संरक्षण की पहचान की जाए।
जनता अब साफ देख रही है कि कौन कानून के साथ खड़ा है और कौन अवैध कब्जों व माफिया तत्वों के संरक्षण में। सवाल धरने का नहीं, नीयत का है—और इसी नीयत पर अब राजनीतिक दलों को जनता के सामने जवाब देना होगा।


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