भगवान गणेश ‘प्रथम पूजनीय भगवान’ माने जाते हैं, जो भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं. उनके विशेष रूप और गुणों की वजह से वे सभी देवताओं में सबसे अलग माने जाते हैं.

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हाथी जैसा सिर, लंबे दांत और उसके साथ बड़े-बड़े कान. इन्हीं विशेषताओं के कारण गणेश जी की एक अलग पहचान है. अधिकतर लोग जानते हैं कि भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश जी का सिर काट किया था. लेकिन यह बहुत कम ही लोगों को पता है कि आखिर बप्पा के लिए किसी इंसान की जगह हाथी का ही सिर क्यों चुना गया था. चलिए हम आपको बताते हैं इसका कारण.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

गणेश जी को कैसे मिला हाथी का सिर?

धर्म शास्त्रों और पुराणों में गणेश जी को हाथी का सिर लगाए जाने के पीछे कई कथाएं मिलती हैं.पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती को स्नान करने के लिए जाना था और कोई भी बाहर पहरा देने के लिए नहीं था. तब माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक बालक बनाया, उसमें प्राण डाले और नाम रख दिया गणेश. फिर माता पार्वती ने बालक से बाहर पहरा देने के लिए कहा और किसी को अंदर न जाने का आदेश भी दिया.

भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा?

तभी वहां भगवान शिव पहुंचे और अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन जब गणेश जी ने देवी पार्वती के स्नान करने के दौरान उन्हें द्वार के अंदर जाने से रोका तो शिवजी को गुस्सा आ गया. भोलेनाथ ने क्रोधित होकर उस बालक का सिर काट दिया. इस घटना के बाद जब देवी पार्वती के बाहर आईं तो यह सब देखकर वे बहुत दुखी हुईं और रोने लगीं.

गणेश जी को इसलिए लगाया गया हाथी का सिर

माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि अगर उन्होंने इस बालक को जीवित नहीं किया, तो वे चली जाएंगी. माता पार्वती को रोते हुए देखकर भगवान शिव ने गणेश को जीवित करने का वचन दिया. फिर भगवान शिव ने अपने गणों से कहा कि उत्तर दिशा में जाओ और जो सबसे पहला सिर दिखे उसे ले आओ. उनके गणों को इंद्र का हाथी एरावत दिखा और वे उसके सिर काटकर ले गए. फिर भगवान शिव ने एरावत हाथी के सिर को गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया. तभी से गणेश जी गजानन कहलाए.


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