रात, रंजिश और रोडवेज: खटीमा बस अड्डा बना खून से सना मैदान

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खटीमा का रोडवेज बस अड्डा—जहां आमतौर पर रात की आख़िरी बसें, चाय की भाप और यात्रियों की थकान दिखाई देती है—वहीं देर रात अचानक खौफ का मंज़र बन गया। पुरानी रंजिश ने ऐसा हिंसक रूप लिया कि चाकुओं की चमक में एक युवक की ज़िंदगी बुझ गई और दो अन्य मौत से जूझते हुए हायर सेंटर भेजे गए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

रात करीब दस बजे युवकों के दो गुट आमने-सामने आए। पहले जुबानी तकरार, फिर हाथापाई और देखते ही देखते चाकूबाज़ी। कुछ ही पलों में रोडवेज परिसर अफरातफरी में बदल गया। लोग इधर-उधर भागते दिखे, और हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

इस हमले में 24 वर्षीय तुषार शर्मा (पुत्र मनोज शर्मा), 23 वर्षीय सलमान (पुत्र शब्बू) निवासी पकड़िया और 21 वर्षीय अभय (पुत्र कन्हैया लाल) गंभीर रूप से घायल हो गए। साथियों ने आनन-फानन में उन्हें उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन वार्ड-10 निवासी तुषार जिंदगी की जंग हार गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. गरिमा ने सलमान और अभय की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।

तुषार, जो पीलीभीत रोड स्थित एक ट्रांसपोर्ट में काम करता था, की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती हिंसा पर लगाम कब लगेगी। कोतवाल विजेंद्र शाह के अनुसार, घायलों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और हमलावरों की तलाश में टीमें लगाई गई हैं।

बस अड्डे की वह रात अब खामोश है, लेकिन सवाल गूंज रहा है—क्या रंजिशें यूं ही सार्वजनिक जगहों पर खून बहाती रहेंगी, या कानून का डर फिर लौटेगा?


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