शिक्षा का ‘नोबेल’: भारतीय शिक्षाविद रूबल नागी ने जीता ग्लोबल टीचर प्राइज, मिली $1 मिलियन (₹9 करोड़) की पुरस्कार राशि

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रुद्रपुर / नई दिल्ली: भारत की प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी ने शिक्षा के क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘ग्लोबल टीचर प्राइज 2026’ (Global Teacher Prize 2026) जीतकर दुनिया में तिरंगा लहराया है। दुबई में आयोजित ‘वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट’ (World Governments Summit) के दौरान उन्हें इस वैश्विक पुरस्कार से नवाजा गया। सम्मान के साथ उन्हें 10 लाख डॉलर (लगभग 9.06 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम पुरस्कार राशि प्रदान की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


यह पुरस्कार GEMS Education और वर्की फाउंडेशन (Varkey Foundation) की एक संयुक्त पहल है, जिसे यूनेस्को (UNESCO) के सहयोग से प्रदान किया जाता है। दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने खुद रूबल नागी को यह सम्मान सौंपा। वह यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला हैं।
दीवारों को बनाया ब्लैकबोर्ड: क्यों मिला यह वैश्विक सम्मान?
रूबल नागी को यह पुरस्कार उनके क्रांतिकारी और अनूठे आर्ट-बेस्ड एजुकेशन मॉडल (Art-led Education Model) के लिए मिला है। उन्होंने पारंपरिक क्लासरूम की सीमाओं को तोड़कर झुग्गी-झोपड़ियों और पिछड़े गांवों की उपेक्षित और टूटी-फूटी दीवारों को ‘लिविंग वॉल्स ऑफ लर्निंग’ (Living Walls of Learning) में बदल दिया।
दीवारों से पढ़ाई: इन दीवारों पर बड़े और रंगीन इंटरैक्टिव भित्ति चित्र (Murals) बनाए गए हैं। इनके माध्यम से बच्चे हँसते-खेलते साक्षरता, गणित, विज्ञान, इतिहास के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता जैसे विषय सीखते हैं।
800 से अधिक शिक्षण केंद्र: पिछले दो दशकों में अपने संगठन ‘रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन’ के जरिए उन्होंने देश के 100 से अधिक वंचित समुदायों में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर स्थापित किए हैं।
10 लाख से अधिक बच्चों को फायदा: उनके इस प्रयास से अब तक 10 लाख से ज्यादा बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। इस जमीनी बदलाव के कारण इन क्षेत्रों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर (Dropout rate) में करीब 50% की कमी आई है।
5,000 दावों को पछाड़कर बनीं विजेता
इस वर्ष इस पुरस्कार के लिए दुनिया के 139 देशों से 5,000 से अधिक नामांकन और आवेदन आए थे। इन सभी वैश्विक दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए भारत की रूबल नागी ने शीर्ष स्थान हासिल किया।
पुरस्कार जीतने के बाद भावुक होकर रूबल नागी ने कहा, “यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि भारत के उन लाखों बच्चों और शिक्षकों की है जो हर दिन विपरीत परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ रहे हैं। कला सिर्फ दीर्घाओं (Galleries) में सजाने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बदलने का एक सशक्त माध्यम है।”
पुरस्कार राशि का क्या करेंगी रूबल?
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूबल नागी इस $1 मिलियन (9 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि का उपयोग देश के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र  खोलने के लिए करेंगी, ताकि वंचित युवाओं को आत्मनिर्भर और कुशल बनाया जा सके।
रूबल नागी की इस ऐतिहासिक सफलता पर भारत के कई गणमान्य नागरिकों और मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया पर बधाई देते हुए इसे देश के लिए एक बेहद ‘गर्व का क्षण’ बताया है।
एआई गलती कर सकता है, इसलिए इसके जवाबों की दोबारा जांच कर लें

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